अपनी जड़ें
देश हो या विदेश
ना काटो तुम।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
बर्फीली हवा
मैदानी इलाकों में
उतर आई ।
भावुक मन और सिंधु का, एक सरीखा रूप।
जिस पर जितनी तरलता, उतनी उस पर धूप।।
डॉ. कुँअर बेचैन
26 जनवरी 2026, 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें
नित नयी लिखती रहें कथायें शौर्य और पराक्रम की।।
उम्मीदें जगीं
सपनों की चादर
बुनने लगी।
खिले कमल
पंक में रहकर
पंक से दूर।
शत्-शत् नमन माँ शारदे!
भावाँजलियाँ अर्पित तुम्हें माँ शारदे!
काव्याँजलियाँ अर्पित तुम्हें माँ शारदे!
वरद हस्त सर पर हमारे!
हमेशा आपका बना रहे माँ शारदे!
23 जनवरी, 2026 बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें