Thursday, January 22, 2026


नया संघर्ष

नयी ऊँचाई पे ही

जन्म है लेता।

                     डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, January 21, 2026


'अक्षर' है वो

जो क्षर नहीं होता

ब्रह्म स्वरूप।

                       डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, January 20, 2026


रात गुनगुनाती रही,

थपकी देकर सुलाती रही।

औ' हम ख्वाबों में खोये

जागे रहे रात भर।।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, January 19, 2026


परीक्षा-घड़ी

धैर्य और संयम

खोयें ना हम।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, January 18, 2026


वो शब्द नहीं हैं! आँसू हैं जो

कविता बन कागज पे उतर आयें हैं। 

कैसे! उन्हें हम मुस्कुरा कर महफिल में गा दें,

जो रूँधे कंठ से लिखे गये हैं।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग

Saturday, January 17, 2026


दूर बजती

मंदिर की घंटियाँ

देती सुकून।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, January 16, 2026


झिलमिलाये

चाँद की छवि

जब-जब छेड़े

चंचल हवा

नदी का जल।

                         डॉ. मंजूश्री गर्ग