अरूणिम सुबह हो तुम, सुरमई शाम हो तुम
कड़ी धूप में छाँव हो तुम
प्रिये! मनमीत हो तुम।
जिंदगी तुमसे शुरू, पूरी होगी तुमसे ही
जीवन आधार हो तुम
प्रिये! मनमीत हो तुम।
डॉ. मंजूश्री गर्ग