Sunday, June 7, 2026

 

खुबानी

डॉ. मंजूश्री गर्ग

                             

खुबानी को अंग्रेजी में एप्रिकोट(Apricot) कहते हैं। यह प्रूनसनाम के वनस्पति परिवार का गुठलीदार फल है। खुबानी मुख्यतः ठंड़े प्रदेशों में उगाया जाता है, अधिक गर्मी में खुबानी का पौधा मर जाता है। विश्व में सबसे ज्यादा खुबानी तुर्की में पैदा की जाती है। भारत में कशमीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में पैदा की जाती है। ताजा खुबानी फल के रूप में खाई जाती है और सूखी खुबानी बादाम, अखरोट, आदि मेवा की तरह खाई जाती है। खुबानी के फल गर्मी के मौसम में आते हैं और इनकी तासीर गर्म होती है। खुबानी की गुठली को तोड़कर एक बादाम की गिरी निकलती है जिसे खा सकते हैं। वयस्क एक बार में 5-6 गिरी से ज्यादा न खायें व यह गिरी बच्चों को नहीं देनी चाहिये क्योंकि इसमें हल्की मात्रा में एक हैड्रसायनिक एसिड नाम का जहरीला पदार्थ होता है।

 

खुबानी के पेड़ की लंबाई 8 से 12 मी. तक होती है और तने की मोटाई 40 से. मी. के आस-पास होती है। ऊपर से पेड़ की टहनियाँ व पत्तियाँ फैली हुई होती हैं। पत्ती का आकार 5 से 9 से. मी. लम्बा व 4 से 8 सें. मी. चौड़ा होता है अग्रभाग नुकीला होता है। फूल पाँच पंखुरियों वाले सफेद या हल्के गुलाबी रंग के होते हैं। यह फूल अकेले या दो फूलों के जोड़ों में खिलते हैं। खुबानी का रंग अधिकांशतः पीला या नारंगी रंग का होता है, जिधर सूरज की रोशनी पड़ती है उधर से रंग हल्का लाल हो जाता है। खुबानी का छिलका बहुत मुलायम होता है कभी-कभी बाहरी सतह पर हल्के रोयें होते हैं। खुबानी का रंग जितना गहरा होता है, उसमें विटामिन ई, विटामिन सी और पोटेशियम की मात्रा उतनी ही अधिक होती है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 


Saturday, June 6, 2026


मोती का आभास है ओस की बूँद।

पर, पल भर को मोती से क्या कम है?

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, June 5, 2026


यौवन की देहरी पे

सजी लाज की कनातें

प्रिय के स्वागत में

मुस्कानों के फूल सजे।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, June 4, 2026


सादा पत्थर

पूजा तुमने, तभी

बना है शिव।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, June 3, 2026


नदियों में बहुत शांत थी, झीलों पे बहुत चुप

सागर की तरंगों में उछलती हुई नावें।

            डॉ. कुँअर बेचैन 

Tuesday, June 2, 2026


डोर ऊपर

कठपुतली सम

नाचते हम।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, June 1, 2026


सुख-छतरी

दुख की बारिश में 

काम ना आई।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग