हवायें चलें
या बरसें बादल
छटेगी धुंध।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
तेरे रूप से
साकार है संसार
गंध जीव में।
जग सौन्दर्य
मन का भी सौन्दर्य
देखा कवि ने।
अपनी जड़ें
देश हो या विदेश
ना काटो तुम।
बर्फीली हवा
मैदानी इलाकों में
उतर आई ।
भावुक मन और सिंधु का, एक सरीखा रूप।
जिस पर जितनी तरलता, उतनी उस पर धूप।।
डॉ. कुँअर बेचैन
26 जनवरी 2026, 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें
नित नयी लिखती रहें कथायें शौर्य और पराक्रम की।।