Tuesday, February 10, 2026


ज्ञान की धारा भी, नदी की धारा के समान ऊपर से नीचे की ओर बहती है इसीलिये गुरू का 

आसन हमेशा शिष्य के आसन से ऊँचाई पर होता है।

                                                                    डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, February 9, 2026


मैं आऊँगा! आऊँगा! आऊँगा!

कभी मैं हवा बन के आऊँगा,

बिखरेंगी जुल्फें तेरी, सवारूँगा।


कभी मैं चाँद बन के आऊँगा,

छूकर गात तेरे, चाँदनी बिखराऊँगा।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, February 8, 2026


देखते ही उन्हें पलकें झुका लेते हैं।

नजर लग जाती है नजर भर देखने से।

                नीरा नंदन 

Saturday, February 7, 2026


प्यार, ममता

सदभावना पले

जन-मन में।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग

 

Friday, February 6, 2026


पासे का खेल

'चौपड़' बना 'लूडो'

वही पुराना।

                  डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, February 5, 2026

 

बसन्ती मौसम

पीली-पीली सरसों

मनभावन।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

Wednesday, February 4, 2026


और झुके हैं

फलों से लदे वृक्ष

नतमस्तक।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग