पिय से मिल
मन मयूर नाचे
गाये कोयल।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
चार दिन की चाँदनी से जिंदगी कटती नहीं,
जिंदगी को चाहिये हर दिन ही नहीं, हर पल उजाला।।
तुमसे मिल
जिंदगी मीठी हुई
नीम सरीखी।
भोर चहकी
इठलाई किरन
महकी क्यारी।
बदलते मौसम का हाल क्या कहिये,
सेंसेक्स की तरह चढ़ता-उतरता है पारा।
घोंसला एक
तिनके गूँथ-गूँथ
बया ने रचा।