बैष्णों देवी माँ
त्रिकुट पर्वत पे
सदा विराजें।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
मीठा जल भी
सागर में मिल के
खारा ही खारा।
धूल नहीं ये
हल्दी सी है बिखरी
आज हवा में। *
*4-6-2010 का प्रकृति का दृश्य, जब वातावरण में चारों तरफ हवा में पीला रंग धूल में मिला हुआ था
बच्चे आँगन
फुलवारी है खिली
महके मन।
मन द्वारे पे
खिले खुशी के रंग
सजी रंगोली।
'आम' हैं आप
खास 'आम' हैं पर
'आमों' के बीच।
भाल पे होंठ किसने रखे
जिंदगी में महावर घुली।
दृष्टि वो बन गई बाँसुरी
देह ये हो चली गोकुली।
शिवओम अम्बर