यहाँ वहाँ क्या!
फूल खिले कहीं भी
देंगे सुगंध।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
मधुर तान
सुनाये बाँसुरिया
अधर बसी।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
अजूबा एक
गुलमोहर बीच
खिला गुलाब।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
25 अक्टूबर, 2026 अश्विन मास शरद पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनायें
सोना, मानुष
जितना तपता है
खरा होता है।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
नाटक वही
अभिनेता बदले
राजनीति में।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
चमकेगी ही
विरोधों में प्रतिभा
जैसे दीपक।
डॉ. मंजूश्री गर्ग