पासे का खेल
'चौपड़' बना 'लूडो'
वही पुराना।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
बसन्ती मौसम
पीली-पीली सरसों
मनभावन।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
और झुके हैं
फलों से लदे वृक्ष
नतमस्तक।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
सूर के पद
तुलसी की चौपाई
युगों ने गायीं।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
कैसे कटें ये
दिन औ' रात बिन
धूप-चाँदनी।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
हवायें चलें
या बरसें बादल
छटेगी धुंध।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
तेरे रूप से
साकार है संसार
गंध जीव में।
डॉ. मंजूश्री गर्ग