Saturday, April 4, 2026


छेड़ा जो जल

अनगिन लहरें

नदी में बनी।

                      डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, April 3, 2026


मन द्वारे पे

खिले खुशी के रंग

सजी रंगोली।

                       डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, April 2, 2026


जय श्री राम

राम-सेतु बनाया

नल-नील ने।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, April 1, 2026


दो घड़ी ठहर कर

जीवन की नदी को

बहते देखना है

कविता वहीं कहीं है।

             प्रसून जोशी 

Tuesday, March 31, 2026


सिंहासन पे

राम की पादुकायें

राम वन में।

                     डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, March 30, 2026


प्यार की ज्योत से आलोकित है अंतर्मन,

बहती हैं ज्ञान की नित नयी निर्मल धारायें।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, March 29, 2026


छूटी लगाम

दौड़े मन के घोड़े

टूटा संयम।

                  डॉ. मंजूश्री गर्ग