ता उम्र बँधे
कच्चे धागे की डोर
कितनी दृढ़!
डॉ. मंजूश्री गर्ग
कंकड़ ने बनाये, अनगिन वृत्त।
मन मेरा, पानी सा तरल।।
गंगा, यमुना
औ' सरस्वती मिलें
संगम तीर्थ।
रात भोली सी
और अनूठे दिन
बचपन में।
किसने रंग
आकाश में उँडेले
रंगे बादल।
तेरे नयना
आईना बने मेरे
रूप निहारूँ।
अनसुनी की
दस्तक देते रहे
फिर भी हम।