जब चाहते हैं प्रभु, दर्शन तभी मिलते हैं।
हम में कहाँ सामर्थ्य है, तीर्थ हम कर पायें।।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
चपलता से
घुटरून चलत
दौड़ते राम।
जलता दिया
मिट्टी का या सोने का
एक समान।
सादा पत्थर
पूजा तुमने, तभी
बना है 'शिव'।
सागर बसी
मचलती नदियाँ
करती शोर।
राधा के संग
झूला झूलें हैं कान्हा
गायें मल्हार।
हरियाली तीज की हार्दिक शुभकामनायें
रिमझिम-रिमझिम बूँदें सरसा रही मन को।
सखियों संग झूलों की पेंगे छूने चली गगन को।