Sunday, June 28, 2026


तेरी यादों की खुशबू से जी भरता ही नहीं।

घूमते रहते हैं दिन-रात इसी उपवन में।।

                             डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, June 27, 2026

 

माँझी वही जो

प्रतिकूल हवा में

पार लगा दे।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

Friday, June 26, 2026

 


फालसा


डॉ. मंजूश्री गर्ग

फालसा को अंग्रेजी में इंडियन शरबत बेरी(Indian Sherbet Berry) या फालसा बेरी(Phalsa Berry) कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Grewia asiatica है। फालसा दक्षिणी एशिया में भारत, पाकिस्तान, कंबोडिया में गर्मी के मौसम में बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता है।

फालसा फल की झाड़ियाँ होती हैं जो 8 मी. तक की हो सकती हैं। इसकी पत्तियाँ 5-12 सें. मी. तक लंबी होती हैं और इसके फूल और फल गुच्छों में लगते हैं। जिनमें एक-एक फूल 2 सें. मी. व्यास का होता है और इसमें 12 मि. मी. की पाँच पंखुरियाँ होती हैं। इन फूलों से 5 से 12 मि.मी. व्यास के फल बनते हैं जो फालसा कहलाते हैं। इनका रंग जामुनी, मैरून का मिला-जुलासा फालसई रंग होता है इन्हीं के कारण रंगों की दुनिया में फालसई रंग वर्णित हुआ है जैसे बादामी रंग बादाम के बाहरी कठोर छिलके के रंग के कारण कहा जाता है। फालसे खट्टे-मीठे बहुत ही स्वादिष्ट व गुणकारी होते हैं। फालसे का शरबत भी बनाया जाता है, जिसकी तासीर बहुत ठंडी होती है। गर्मियों के मौसम में फालसे का सेवन बहुत लाभप्रद होता हैं।

 

 


Thursday, June 25, 2026


दीपित है चाँद सूरज की रोशनी से

मोहित हैं हम चाँद की चाँदनी पे।।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, June 24, 2026


हर पड़ाव

देते हमें विश्राम

राह में बने।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, June 23, 2026


बेटी सँवारे 

दोनों कुल कूल से

बन के नदी।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, June 22, 2026


जब समय तुम्हारा है, हर कोई सुनता है।

वरना किस के पास समय है किसी के दर्द सुनने का।।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग