माँझी वही जो
प्रतिकूल हवा में
पार लगा दे।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
सागर तट
एक बूँद मुस्काई
सीपी से मिल।
पारखी नजरें--
हर गोल चीज चाँद नहीं होती।
हर पीली चीज सोना नहीं होती।
हर पत्थर नगीना नहीं होता।
परख ही लेती हैं पारखी नजरें,
जिसको जिसकी चाहत होती है।
हो आदि शक्ति तुम ही
निराकार हो या साकार तुम,
हो आदि शक्ति तुम ही।
नदियाँ इठलाती चलतीं,
फलती-फूलती प्रकृति तुम से ही।
गृह-नक्षत्र रहते घूमते,
चाँद चाँदनी बरसाता तुम से ही।
लीन प्रलय में होकर एक दिन,
नव जीवन सब पाते तुम से ही।
शारदीय नवरात्रों में हम ही नहीं करते आराधना माँ देवी की,
गुलमेंहदी, गुलदाउदी, गेंदा, गुलाब महक कर कर रहे हैं आऱाधना।
11 अक्टूबर 2026, रविवार, अश्विन मास शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि
श्री अग्रसेन जयंती पर अग्रसेन महाराज को शत्-शत् नमन
वंशावली में
माता-पिता शामिल
सदा रहेंगे।