Friday, May 15, 2026


भाल पे होंठ किसने रखे

जिंदगी में महावर घुली।

दृष्टि वो बन गई बाँसुरी

देह ये हो चली गोकुली।

                शिवओम अम्बर 

Thursday, May 14, 2026


साँसों में बसा लो खुशबू की तरह

महका  करेंगे  तेरे  आंगन में। 

                डॉ. मंजूश्री गर्ग

Wednesday, May 13, 2026


तुमसे मिल

जिंदगी मीठी हुई

नीम सरीखी।

                            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, May 12, 2026


अटल हैं जो

अडिग हैं इरादे

ध्रुव हैं वही।

                        डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, May 11, 2026


एक औ' एक

दो नहीं, हैं ग्यारह

साथ मिलें तो।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, May 10, 2026


उससे हारी दुनिया सारी,

खुद से जो भी जीत गया।

                देवेन्द्र माँझी 

Saturday, May 9, 2026


यौवन की देहरी पे

सजी लाज की कनातें

प्रिय के स्वागत में

मुस्कानों के फूल सजे।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग