नाटक वही
अभिनेता बदले
राजनीति में।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
चमकेगी ही
विरोधों में प्रतिभा
जैसे दीपक।
सुखदायी है
दाहिनीवर्ती शंख
देता समृद्धि।
अखंड ज्योत
रोशन जहाँ सारा
मिटा अँधेरा।
सजे कलश
छलके रंग द्वार
पावन पर्व।
सम आकार
चतुर्भुज बनायें
चार भुजायें।