Tuesday, September 1, 2026

 

गुलमोहर

 

डॉ. मंजूश्री गर्ग


लाल वितान

छत्र सा सजे द्वार

गुलमोहर।

          डॉ. मंजूश्री गर्ग

 

गुलमोहर का वानस्पतिक नाम डोलोक्सि रेजिया है। गर्मियों के मौसम में सड़क किनारे व पार्कों में लाल, नारंगी व पीले फूलों से लदे गुलमोहर के वृक्ष विशेष रूप से आकर्षित करते हैं। गुलमोहर को रॉयल पोंइशियाना व फ्लेम ट्री के नाम से भी जाना जाता है। इसे स्वर्ग का फूलभी कहते हैं। संस्कृत में इसे कृष्ण चूड़ भी कहते हैं, क्योंकि श्री कृष्ण भगवान की प्रतिमा के मुकुट का श्रृंगार गुलमोहर के फूलों से भी किया जाता है। भारत में गुलमोहर के वृक्ष गर्म व नमी वाले सभी स्थानों में पाये जाते हैं। भारत में गुलमोहर के फूल मार्च-अप्रैल से लेकर जुलाई-अगस्त तक देखने को मिलते हैं। भारत के अतिरिक्त युगांडा, नाइजीरिया, श्रीलंका, मेक्सिको, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, आदि देशों में भी गुलमोहर के वृक्ष पाये जाते हैं। यद्यपि मेडागास्कर गुलमोहर का मूल उत्पत्ति स्थान है, लेकिन आजकल प्रायः वहाँ देखने को नहीं मिलते हैं।।

गुलमोहर के पेड़ की लंबाई 20 से 25 फुट तक होती है और ऊपर से फैला हुआ होता है जो पेड़ के ऊपर लगभग एक छत्र का आकार लेता है। पत्तियाँ संयुक्त होती हैं और बहुत छोटी-छोटी होती हैं जो पतली-पतली टहनियों पर दोनों ओर लगी होती हैं। यह टहनियाँ एक बड़ी टहनी के दोनों ओर समानांतर लगी होती हैं जो मिलकर 10-12 इंच का आकार लेती हैं जो देखने में फर्न जैसी बहुत ही सुंदर लगती हैं। यह पत्तियाँ बहुत ही नाजुक होती हैं जो जरा सी हवा चलते ही झड़ जाती हैं। गुलमोहर के फूल प्रत्येक देश के मौसम के अनुसार अलग-अलग समय में खिलते हैं। गुलमोहर का फूल आकार में बड़ा होता है लगभग 13 से.मी. का। फूल में पाँच पँखुड़ियाँ होती हैं। चार पँखुड़ियाँ आकार और रंग में एक समान होती हैं, पाँचवी पँखुड़ी थोड़ी लंबी होती है जिसमें पीले या सफेद धब्बे होते हैं। गुलमोहर के फूल मकरंद के अच्छे स्रोत होते हैं, शहद की मक्खियाँ इन पर खूब मँडराती हैं। कुछ समय बाद इन फूलों पर फली लगती हैं जो लगभग 8 से 10 इंच लंबी होती हैं और इनमें भूरे रंग के बीज होते हैं। आयुर्वेदिक की कुछ औषधियों में गुलमोहर के बीज व छाल का प्रयोग किया जाता है।

 

 

Monday, August 31, 2026


रोड़े बनी हैं,

प्रगति-पथ पर

अच्छाईयाँ ही।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

 

Sunday, August 30, 2026


किसने रंग

आकाश में उँड़ेले

रंगे बादल।

                          डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, August 29, 2026


नई आशायें

अंकुरित हैं बीज

नये युग के।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, August 28, 2026


भीगी हवा में

बरसती बूँदों में

भीगा है मन।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, August 27, 2026


बरसे घन

या बरसे सावन

सरसे धरा।

                       डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, August 26, 2026


खुशी के पल 

धूप खिली आँगन

छँटा कोहरा।

               डॉ. मंजूश्री गर्ग