'आईना' देखा
औ' तुम मिल गये
पल भर में।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
अंगूर
डॉ.
मंजूश्री गर्ग
अंगूर एक स्वादिष्ट व सुंदर फल है। संस्कृत में इसे
द्राक्ष व अंग्रेजी में Grapes कहते
हैं। आम फल को जहाँ फलों का राजा कहा जाता है वहीं अंगूर फल को सर्वोत्तम कहा जाता
है। अंगूर में माँ के दूध के समान पोषक तत्व होते हैं। यह सबल-निर्बल, स्वस्थ-अस्वस्थ
सभी के लिये समान उपयोगी है। अंगूर के रस से आयुर्वेद में ‘द्राक्षासव’ एक औषधि बनती है जिसके सेवन से महिलाओं में होने वाली रक्त
की कमी की पूर्ति होती है। अंगूर के रस के सेवन से रक्त-स्राव की कमी को पूरा किया
जाता है। अंगूर से ही किशमिश, मुनक्के व Wine बनती है। किशमिश का प्रयोग मेवे के रूप में होता है।
मिठाईयों में भी किशमिश को डाला जाता है। ऐसे ही खाने में भी किशमिश स्वादिष्ट व स्वास्थ्यवर्धक
होती हैं। मुनक्के का प्रयोग कब्ज होने पर या बुखार में किया जाता है। Wine का प्रयोग थोड़ी मात्रा में ह्रदय रोगियों के
लिये लाभकारी होता है।
अंगूर की खेती का प्रारम्भ लगभग 5000 वर्ष पूर्व
भारत से हुआ था। अंगूर की बेलें होती हैं जो देखने में बहुत सुंदर लगती हैं- 5 फुट
से 6 फुट तक लंबी होने पर इन्हें तार या पतली लकड़ी के बाने बनाकर फैला दिया जाता
है। अंगूर गुच्छों के रूप में लगते हैं। अंगूर कई प्रकार के होते हैं-एक- हरा या
हल्का पीले रंग के अंगूर होते हैं। यह स्वाद में खट्टे-मीठे होते हैं, आकार में
गोल या लंबे दोनों प्रकार के पाये जाते हैं। इनका व्यास 2 से. मी. से 3 से.मी. तक
होता है। इन्हें सुखाकर किशमिश बनाई जाती है। दूसरे- लाल रंग के अंगूर होते हैं,
इनका आकार थोड़ा बड़ा होता है, स्वाद में मीठा होता है, अंदर बीज भी होता है जो
खाया नहीं जाता। अन्य अंगूरों में बीज बहुत छोटे होते हैं और खाते समय पता ही नहीं
चलते। इन्हीं को सुखाकर मुनक्के बनाये जाते हैं। तीसरे- काले रंग के अंगूर होते
हैं जो आकार में बड़े व स्वाद में मीठे होते हैं। इनके बीज भी बहुत छोटे होते हैं।
इन्हीं से Wine बनाई जाती है।
अंगूर की बेलों की सुंदरता के कारण इन्हें
अधिकांश इमारतों में पत्थरों पर उकेरा गया है। उदाहरण- आगरा में दयालबाग मंदिर में
अंगूर की बेलों की नक्काशी देखने को मिलती है।