Wednesday, February 4, 2026


और झुके हैं

फलों से लदे वृक्ष

नतमस्तक।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, February 3, 2026


सूर के पद

तुलसी की चौपाई

युगों ने गायीं।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, February 2, 2026


कैसे कटें ये

दिन औ' रात बिन

धूप-चाँदनी।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, February 1, 2026


हवायें चलें

या बरसें बादल

छटेगी धुंध।

                    डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, January 31, 2026


तेरे रूप से

साकार है संसार

गंध जीव में।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, January 30, 2026


जग सौन्दर्य

मन का भी सौन्दर्य

देखा कवि ने।

                 डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, January 29, 2026


अपनी जड़ें

देश हो या विदेश

ना काटो तुम।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग