टोक देता है कदम जब भी गलत उठता है
ऐसा लगता है कोई मुझसे बड़ा है मुझमें।
कृष्ण बिहारी 'नूर'
सजे हिंडोले
झूले हैं राधा-कृष्ण
वृन्दावन में।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
कलियुग में
साम्राज्य झूठ का
सच की हार।
बिन थामे ही हाथ, हमेशा
थामे रहते हाथ हमारा।
कैसे कह दें? साथ नहीं हो
पल-पल साथ निभाते हो।
खुशी के पल
धूप खिली आँगन
छँटा कोहरा।
बनोगे संत
अहंकार अपना
तोड़ो तो सही.
आज की बातें
बीते युग की बातें
होनी हैं कल।