Sunday, September 20, 2026


बरखा बाद

धानी चूनर ओढ़

सजी धरती।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, September 19, 2026


श्री नरेश मेहता

 

जन्म-तिथि- 15 फरवरी,1922, शाजापुर(मध्य प्रदेश)

पुण्य-तिथि- 22 नवंबर,2000, भोपाल(मध्य प्रदेश)

श्री नरेश मेहता आधुनिक हिन्दी साहित्य के एक प्रतिष्ठित कवि, लेखक व नाटककार थे। उनका बचपन का नाम पूर्णशंकर था। नरसिंह गढ़ की राजमाता ने एक सभा में उनके काव्य-पाठ पर प्रसन्न होकर उन्हें नरेशउपाधि दी। कालांतर में उन्होंने अपना यही नाम रख लिया।  उनका काव्य-लेखन 1935-36 से आरंभ हुआ। मुक्तिबोध, प्रभाकर माचवे, नेमिचंद्र जैन, सोहनलाल द्विवेदी, सुभद्रा कुमारी चौहान, आदि कवियो से प्रशंसा पाकर काव्य लेखन की ओर अग्रसर हुये। बनारस विश्व विद्यालय से एम. ए. किया। ऑल इंडिया रेडियो, इलाहाबाद में कार्यकारी अधिकारी के रूप में कार्य किया। इन्दौर से प्रकाशित चौथा संसार’  हिन्दी दैनिक का संपादन भी किया। श्री अज्ञेय जी द्वारा सम्पादित दूसरा सप्तक के एक प्रमुख कवि के रूप में प्रसिद्ध हुये। सन्1956 में नलिन विलोचन शर्मा व केसरी कुमार के साथ मिलकर नकेनवादकी स्थापना की।

श्री नरेश मेहता ने आधुनिक कविता को नयी व्यंजना के साथ नया आयाम दिया। रागात्मकता, संवेदना और उदात्तता उनकी सर्जना उनकी कविता के मूल त्तत्व हैं। कविता के अतिरिक्त उपन्यास, कहानी, नाटक, संस्मरण, आलोचना, आदि विधाओं में भी उनका रचनात्मक योगदान रहा। उनके साहित्यिक जीवन के निर्माण में उनकी पत्नी महिमा मेहता का भी विशेष योगदान रहा। उनकी प्रमुख कृतियाँ है-

काव्य-संग्रह-  वन पाखी!, बोलने दो चीड़ को, मेरा समर्पित एकांत, पिछले दिनों नंगे पैर, अरण्या, आदि।

खण्ड-काव्य- संशय की एक रात, शबरी, प्रार्थना पुरूष, आदि।

उपन्यास- यह पथ बंधु था, नदी यशस्वी है, आदि।

कहानी-संग्रह- तथापि, एक समर्पित महिला, जलसाघर, आदि।

श्री नरेश मेहता को सन् 1988 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया व सन् 1992 में भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

श्री नरेश मेहता की कुछ कविताओं के अंश-

शब्द केवल शब्द नहीं होते

वे प्रार्थनायें होती हैं

जो मनुष्य के भीतर का अंधकार हर लेती हैं।

                        नरेश मेहता

 

मौन भी एक भाषा है,

बशर्ते उसे सुनने वाला

कोई ह्रदय मौजूद हो।

            नरेश मेहता

  

Friday, September 18, 2026


 

भीड़ में रहोगे तो पहचान कैसे बनेगी।

अपनी पहचान बनानी है तो लीक से हट कर चलो।।

                  डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, September 17, 2026



17 सितम्बर, 2026 माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी 

को

जन्म-दिन की हार्दिक व मंगलमय शुभकामनायें

आशा है आपके सफल नेतृत्व में हमारा भारत निरंतर प्रगति-पथ पर अग्रसर रहे।

विश्व-पटल पर हमारा मान-सम्मान बढ़ता रहे।




 


17 सितम्बर, 2026 विश्वकर्मा दिवस पर विश्वकर्मा जी को शत्-शत् नमन

एवम्

आप सभी को हार्दिक शुभकामनायें

 

Wednesday, September 16, 2026


खुशबू संग

झर-झर झरते

हरसिंगार।

                       डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, September 15, 2026


धूप में खिले

छुईमुई के फूल

ग्रीष्म बहार।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग