जब समय तुम्हारा है, हर कोई सुनता है।
वरना किस के पास समय है किसी के दर्द सुनने का।।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
काफल
डॉ. मंजूश्री गर्ग
काफल का वैज्ञानिक नाम Myrica esculata है। काफल का पेड़ सदाबहार जंगली पेड़ है। काफल के फल गर्मियों के मौसम में पर्वतीय स्थनों में आते हैं और वहाँ बहुत लोकप्रिय हैं। काफल के पेड़ भारत या नेपाल के पर्वतीय क्षेत्रों में या हिमालय के तराई वाले इलाकों में पाये जाते हैं। काफल के पेड़ एक बड़े वृक्ष या झाड़ी के रूप में मिलते हैं। फलों का आकार बहुत ही छोटा, गोल व दानेदार होता है लगभग 1 से.मी. व्यास से भी कम। रंग हल्का मैरून या जामुनी रंग का मिला-जुला होता है। काफल के फल खाने में खट्टे-मीठे बहुत ही स्वादिष्ट होते हैं व तासीर ठंड़ी होती है।
खिरनी या
Mimosops Hexandra
डॉ. मंजूश्री गर्ग
खिरनी का फल देखने में लगभग नीम की निवोली के
जैसा होता है लेकिन खाने में बहुत ही स्वादिष्ट व मीठा होता है। खिरनी के पेड़
उत्तर भारत में अपने आप उग जाते हैं। इसका पेड़ बहुत ही घना व ऊँचा होता है। ऊँचाई
लगभग 40-50 फुट तक होती है। खिरनी के पेड़ की आयु भी बहुत अधिक होती है। इस पेड़
की लकड़ी बहुत मजबूत होती है और इसकी छाल औषधि के रूप में काम आती है। खिरनी का फल
गर्मियों के मौसम में आता है। खिरनी का फल नीम की निवोली से थोड़ा लम्बा व चटक
पीले रंग का होता है।
लीची
डॉ.
मंजूश्री गर्ग
लीची एक मधुर ड्रूप फल है जो गर्मियों के मौसम
में आता है। इसका वैज्ञानिक नाम Litchi Chinensis है। इसका
मूल उत्पत्ति स्थान चीन माना जाता है। यह ऊष्णकटिबन्धीय फल है। यह मैडागास्कर,
नेपाल, भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, थाइलैंड, फिलीपींस, आदि देशों में पाया जाता
है। भारत में सबसे ज्यादा लीची के बाग उत्तराखण्ड के देहरादून में हैं।
लीची का पेड़ सदाबहार पेड़ हैं जो कि 15 से 20
मी. तक ऊँचा होता है और पत्तियाँ लगभग 15 से 25 से. मी. लम्बी व पतली होती हैं
जिनमें स्निग्धता होती है, देखने में बहुत सुन्दर लगती हैं। फूल छोटे हरे, सफेद या
पीले रंग के सुगंधित होते हैं जो लगभग 30 से. मी. लम्बी पैनिकल पर लगते हैं। फूल
आने के लगभग तीन महीने के बाद फल लगता है। भारत में मई, जून के महीने में फल आता
है। फल का बाहरी छिलका मैरून रंग का होत है जो आसानी से हट जाता है। फल के अंदर दूधिया
रंग का मीठा, रसयुक्त गूदा होता है लीची का यही भाग खाने योग्य होता है। फल के बीच
में भूरे रंग की गुठली होती है। लीची में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता
है।