Saturday, May 9, 2026


यौवन की देहरी पे

सजी लाज की कनातें

प्रिय के स्वागत में

मुस्कानों के फूल सजे।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, May 8, 2026


बूँद-बूँद से समुद्र बने

फूल-फूल से उपवन

तुम अपने को कम

मत समझो, तुमसे ही

देश और विश्व बने।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, May 7, 2026


जो पल जिया

खुशी से, अपना है।

बाकी बेगाने।

                 डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, May 6, 2026


ठहरी बूँद

सीपी सम पाती में

मोती सी सजी।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, May 5, 2026


दिल से, आँखों से, किसी ठौर से देखा ना गया।

वो उजाला था, मगर गौर से देखा ना गया।।

                डॉ. कुअँर बेचैन 

Monday, May 4, 2026


ता उम्र बँधे

कच्चे धागे की डोर

कितनी दृढ़!

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, May 3, 2026


कंकड़ ने बनाये, अनगिन वृत्त।

मन मेरा, पानी सा तरल।।

                     डॉ. मंजूश्री गर्ग