Thursday, February 19, 2026

 

यशोदा हरि पालने झुलावै।

हलरावै दुलराइ मल्हावै, जोइ-सोइ कछु गावै।

मेरे लाल को आउ निंदरिया, काहै ना आनि सुवावै।

तू काहै न बेगहिं आवै, तोको कान्ह बुलावै।

कबहुँ पलक हरि मूँद लेत हैं, कबहुँ अधर फरकावै।

सोवत जानि मौन है करहिँ, करि-करि सैन बतावै।

इति अंतर अकुलाई उठे हरि, जसुमति मधुर गावै।

जो सुख सूर अमर मुनि दुर्लभ, सो नंदभामिनी पावै।

                                      सूरदास

उपर्युक्त पंक्तियों में कवि ने यशोदा के माध्यम से भारतीय माँ का ही चित्र उकेरा है जो पालने में अपने लाल को सुला रही है, सोया जानकर आँखों के इशारे से सबको चुप रहने को कहती है. वहाँ से हटकर घर के और काम करना ही चाहती है कि बालक अकुलाकर उठ जाता है.


Wednesday, February 18, 2026


रंगों पे रंग

फूलों पे तितलियांँ

उड़ती हुईं।

                      डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, February 17, 2026


बर्फ निराली

धूप की छुअन पा

बनी लहर।

                      डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, February 16, 2026


बुलंदियों को देख समझो ये फलसफा,

गहराई नींव की जरूरी है ऊँचाई के लिये।

                शालिनी गर्ग 

Sunday, February 15, 2026



15 फरवरी, 2026 फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि महाशिवरात्री पर्व

 की 
 

हार्दिक शुभकामनायें

Saturday, February 14, 2026


दो पल जिंदगी जिये हम,

एक पल तुमसे मिलने का,

एक पल तुमसे जुदाई का।

दो उपहार मिले जीवन में,

एक उपहार मुस्कान का,

और एक  मिला आँसू का।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

Friday, February 13, 2026


बादलों से आ

मोती बनी सीपी में 

एक बूँद थी।

                     डॉ. मंजूश्री गर्ग