Sunday, April 19, 2026


भावों की नावें

बहती आर-पार

सहज रिश्ते।

                           डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, April 18, 2026


अंश हो तुम

काँटा भी चुभे तुम्हें

होती चुभन।

                      डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, April 17, 2026


सत्य पे टिका

दोलायमान धर्म

डिगता नहीं।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, April 16, 2026


दीप-पतंगा

दोनों साथ जले हैं

प्रीत निभाने।

                          डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, April 15, 2026


सागर भेजे

मेघ लाये संदेशे

नदी के लिये।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, April 14, 2026

सुहाने पल

अतिथि बन आये

सदा दो पल।

                   डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, April 13, 2026


चाह नहीं मैं बूँद सी सीपी में गिरूँ औ मोती बन जाऊँ.

चाह बूँद सी सागर में गिरूँ औ उसी में समा जाऊँ।

 

                     डॉ. मंजूश्री गर्ग