Friday, September 25, 2026


नदी जल में

किल्लोल हैं करती

पानी की बूँदें।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, September 24, 2026


थकित मन

चाँदनी सी शीतल

तेरी छुअन।

                        डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, September 23, 2026


मधु-मालती के फूल रात में खिलें।

महकें और महकायें मन-आँगन।।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, September 22, 2026


ताप सह के

देते हमें हैं छाँव

वट-पीपल।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, September 21, 2026


आज की बातें

बीते युग की बातें

होनी हैं कल।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, September 20, 2026


बरखा बाद

धानी चूनर ओढ़

सजी धरती।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, September 19, 2026


श्री नरेश मेहता

 

जन्म-तिथि- 15 फरवरी,1922, शाजापुर(मध्य प्रदेश)

पुण्य-तिथि- 22 नवंबर,2000, भोपाल(मध्य प्रदेश)

श्री नरेश मेहता आधुनिक हिन्दी साहित्य के एक प्रतिष्ठित कवि, लेखक व नाटककार थे। उनका बचपन का नाम पूर्णशंकर था। नरसिंह गढ़ की राजमाता ने एक सभा में उनके काव्य-पाठ पर प्रसन्न होकर उन्हें ‘नरेश’ उपाधि दी। कालांतर में उन्होंने अपना यही नाम रख लिया।  उनका काव्य-लेखन 1935-36 से आरंभ हुआ। मुक्तिबोध, प्रभाकर माचवे, नेमिचंद्र जैन, सोहनलाल द्विवेदी, सुभद्रा कुमारी चौहान, आदि कवियो से प्रशंसा पाकर काव्य लेखन की ओर अग्रसर हुये। बनारस विश्व विद्यालय से एम. ए. किया। ऑल इंडिया रेडियो, इलाहाबाद में कार्यकारी अधिकारी के रूप में कार्य किया। इन्दौर से प्रकाशित ‘चौथा संसार’  हिन्दी दैनिक का संपादन भी किया। श्री अज्ञेय जी द्वारा सम्पादित ‘दूसरा सप्तक’ के एक प्रमुख कवि के रूप में प्रसिद्ध हुये। सन्1956 में नलिन विलोचन शर्मा व केसरी कुमार के साथ मिलकर ‘नकेनवाद’ की स्थापना की।

श्री नरेश मेहता ने आधुनिक कविता को नयी व्यंजना के साथ नया आयाम दिया। रागात्मकता, संवेदना और उदात्तता उनकी सर्जना उनकी कविता के मूल त्तत्व हैं। कविता के अतिरिक्त उपन्यास, कहानी, नाटक, संस्मरण, आलोचना, आदि विधाओं में भी उनका रचनात्मक योगदान रहा। उनके साहित्यिक जीवन के निर्माण में उनकी पत्नी महिमा मेहता का भी विशेष योगदान रहा। उनकी प्रमुख कृतियाँ है-

काव्य-संग्रह-  वन पाखी!, बोलने दो चीड़ को, मेरा समर्पित एकांत, पिछले दिनों नंगे पैर, अरण्या, आदि।

खण्ड-काव्य- संशय की एक रात, शबरी, प्रार्थना पुरूष, आदि।

उपन्यास- यह पथ बंधु था, नदी यशस्वी है, आदि।

कहानी-संग्रह- तथापि, एक समर्पित महिला, जलसाघर, आदि।

श्री नरेश मेहता को सन् 1988 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया व सन् 1992 में भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

श्री नरेश मेहता की कुछ कविताओं के अंश-

शब्द केवल शब्द नहीं होते

वे प्रार्थनायें होती हैं

जो मनुष्य के भीतर का अंधकार हर लेती हैं।

                        नरेश मेहता

 

मौन भी एक भाषा है,

बशर्ते उसे सुनने वाला

कोई ह्रदय मौजूद हो।

            नरेश मेहता