सुखदायी है
दाहिनीवर्ती शंख
देता समृद्धि।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
अखंड ज्योत
रोशन जहाँ सारा
मिटा अँधेरा।
सजे कलश
छलके रंग द्वार
पावन पर्व।
सम आकार
चतुर्भुज बनायें
चार भुजायें।
माँझी वही जो
प्रतिकूल हवा में
पार लगा दे।
सागर तट
एक बूँद मुस्काई
सीपी से मिल।