Monday, October 19, 2026


 अखंड ज्योत

रोशन जहाँ सारा

मिटा अँधेरा।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

Sunday, October 18, 2026


सजे कलश

छलके रंग द्वार

पावन पर्व।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, October 17, 2026


सम आकार

चतुर्भुज बनायें

चार भुजायें।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, October 16, 2026


माँझी वही जो

प्रतिकूल हवा में

पार लगा दे।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

 

Thursday, October 15, 2026


सागर तट

एक बूँद मुस्काई

सीपी से मिल।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, October 14, 2026


पारखी नजरें--

 

हर गोल चीज चाँद नहीं होती।

हर पीली चीज सोना नहीं होती।

हर पत्थर नगीना नहीं होता।

परख ही लेती हैं पारखी नजरें,

जिसको जिसकी चाहत होती है।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

 

Tuesday, October 13, 2026

 

हो आदि शक्ति तुम ही

 

निराकार हो या साकार तुम,

हो आदि शक्ति तुम ही।

नदियाँ इठलाती चलतीं,

फलती-फूलती प्रकृति तुम से ही।

गृह-नक्षत्र रहते घूमते,

चाँद चाँदनी बरसाता तुम से ही।

लीन प्रलय में होकर एक दिन,

नव जीवन सब पाते तुम से ही।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग