Saturday, July 4, 2026

 

जल ही--------

 

जल ही जीवन

सिंचित उपवन

खिलते फूल।

 

जल ही धार

कटते पत्थर

बनते रेत।

 

जल ही ताप

बनती ऊर्जा

जलते बल्ब।

 

      डॉ. मंजूश्री गर्ग


Friday, July 3, 2026


देव, मानव

अपनी सीमाओं में

बँधे दोनों ही।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, July 2, 2026


नई आशायें

अंकुरित हैं बीज

नये युग के।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, July 1, 2026


आओ कान्हा!

मन धीर ना धरे

तुम्हारे बिन।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, June 30, 2026


आधुनिक लिबास में, आधुनिकता का दम भरते हैं।

जकड़े हैं वही, आज भी रूढ़ियों की सोच में।।

                             डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, June 29, 2026


पंक में रह

कमल सा खिलना

जग का सार।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, June 28, 2026


तेरी यादों की खुशबू से जी भरता ही नहीं।

घूमते रहते हैं दिन-रात इसी उपवन में।।

                             डॉ. मंजूश्री गर्ग