खिले कमल
पंक में रहकर
पंक से दूर।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
सावन ऋतु
मनमीत मिले तो
सरसे मन।
प्यार की ज्योत से आलोकित है अंर्तमन।
बहती हैं ज्ञान की नित नयी निर्मल धारायें।।
समय-धारा
अविरल बहती
नहीं रूकती।
अँधेरी रातें
भादों मास अष्टमी
श्री कृष्ण जन्मे।
1.
रेशम डोरी
चंदन का पलना
झूले हैं कान्हा।
2.
4 सितम्बर, 2026 श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें
भिगो लो मन
बारिशों का मौसम
रोज ना आये।