सत्य पे टिका
दोलायमान धर्म
डिगता नहीं।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
प्यार-सम्मान
शामिल हों अगर
महकें रिश्ते।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
उखड़ेंगे ना
दूब से जुड़े हुये
हम धरा सा।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
तेरे ध्यान में,
या गुम अपने में।
मालूम नहीं?
डॉ. मंजूश्री गर्ग
बिहारी जी की
वृन्दावन में राजे
मृदु मुस्कान।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
ज्ञान का दीप
मन में जलाकर
फैलायें ज्ञान।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
सजे द्वार पे
तोरण औ' कलश
'शुभागमन'।
डॉ. मंजूश्री गर्ग