रंगों पे रंग
फूलों पे तितलियांँ
उड़ती हुईं।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
बर्फ निराली
धूप की छुअन पा
बनी लहर।
बुलंदियों को देख समझो ये फलसफा,
गहराई नींव की जरूरी है ऊँचाई के लिये।
शालिनी गर्ग
की
हार्दिक शुभकामनायें
दो पल जिंदगी जिये हम,
एक पल तुमसे मिलने का,
एक पल तुमसे जुदाई का।
दो उपहार मिले जीवन में,
एक उपहार मुस्कान का,
और एक मिला आँसू का।
बादलों से आ
मोती बनी सीपी में
एक बूँद थी।
मन मोहती
फिर कूकी कोयल
बागों के बीच।