Monday, March 2, 2026


होली पर्व की हार्दिक शुभकामनायें 

फागुन मास

होली का त्यौहार

रंग-रंगीला।

1.


टेसू के रंग

गुझियों की मिठास।

होली के संग।

2.

        डॉ. मंजूश्री गर्ग

Sunday, March 1, 2026


चंदन हम

कोटोगे तो भी हम

देंगे सुगंध।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, February 28, 2026


कन्हैया हो तुम

तुम्हीं कान्हा हो, कन्हैया हो तुम।

तुम्हीं नन्दलाला, वासुदेव हो तुम।

तुम्हीं माखनचोर, चितचोर हो तुम।

तुम्हीं बाँसुरी वादक, सुदर्शन चक्रधारी हो तुम।

गोपों संग ग्वाला, गोपियों की प्रीत हो तुम।

राधा के मनमीत, द्वारकाधीश रूक्मिणी के।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

 

Friday, February 27, 2026


कभी ओला, कभी बारिश,

कभी धनकती धूप।

रोमांच से भरा है

फरवरी का मौसम।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, February 26, 2026


जिंदगी की पतवार तुम ही।

उस पार लगा दो तुम ही।।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, February 25, 2026


 लठ्ठमार होली

कान्हा खेल रहे होली  वृन्दावन में,

राधा राह तके बरसाने में।

आयेगी कान्हा की टोली जब,

लेंगें रंग के साथ खबर लाठी सेे।

कह रही सखियाँ राधा से,

खेलेंगे सब मिल लठ्ठमार होली बरसाने में।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग

Tuesday, February 24, 2026

 

बारह महीना-बसंत

                     डॉ. मंजूश्री गर्ग

बसंत तो हमारे मन में है

बारह महीने रहता है

बस उसे महसूस करना है

आनंद का अनुभव करना है.

 

ग्रीष्म ऋतु में

शीतल पेय और आइसक्रीम

मधुर मुस्कान लाते हैं.

कौन कहता है! ग्रीष्म ऋतु शुष्क ऋतु है

खरबूजे, तरबूज की सरसता

इसी ऋतु में मिलती है.

 

बर्षा ऋतु तो

है पावस ऋतु

चारों ओर हरियाली

भीगी-भीगी हवा

पत्तों से झरता पानी

मन लुभाते ही हैं.

पायस फल आम भी

इसी ऋतु में सरसता भरता है.

 

शरद ऋतु तो

है ही पावन ऋतु

मंद-मंद समीर

स्वच्छ चाँदनी

वृक्षों से झरते

हारसिंगार के फूल

मन में मादकता भरते ही हैं

 

शिशिर ऋतु भी

नहीं है कम सुहावनि

सखियों संग

धूप में चौपालें

रात गये चाय-कॉफी की पार्टी

मेवा की गुटरगूँ

गन्ने की मिठास

इसी मौसम की

सौगातें हैं

 

हेमन्त ऋतु है

ले आती है संदेश बसंत का.

अनायास ही

झड़ते पेड़ों से पत्ते

खेतों में खिलने लगते

सरसों के फूल

सोये हुये अरमान

जागने लगते

फिर एक बार

 

बसन्त ऋतु तो

है बसंत ऋतु

प्रकृति के कण-कण में

नव आनंद, नव उत्साह

नजर आने लगता है.

वृक्ष नये परिधान पहन सज जाते हैं

वहीं पशु-पक्षी ही क्या

वन-तड़ाग तक नव उत्साह से

भर जाते हैं फिर एक बार.

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