Saturday, August 22, 2026

 

लोकाट(फल)

 डॉ. मंजूश्री गर्ग

लोकाट(Loquat) रोजेसी(Rosaceac) कुल का फल है। यह आम, आलू बुखारा, चेरी, आदि की तरह ड्रूप फल है। लोकाट का रंग नारंगी या पीला होता है और आकार नाशपाती जैसा होता है लेकिन छोटा होता है। इसके ऊपर पतला छिलका होता है, अंदर नारंगी रंग का ही गूदा होता है और केंद्र में एक या एक से अधिक कठोर बीज होते हैं। कभी-कभी एक ही लोकाट में 5 से 6 बीज तक पाये जाते हैं। लोकाट का गूदा रसीला होता है व स्वाद खट्टा-मीठा होता है। लोकाट के फल पेड़ पर गुच्छों के रूप में लगते हैं। भारत में लोकाट मार्च-अप्रैल के महीने में आती हैं।

लोकाट का पेड़ मूल रूप से चीन देश का है। लगभग 1000 वर्षों से अधिक समय से चीन में इसकी खेती की जा रही है। जापान में भी 1000 वर्षों से इसकी खेती की जा रही है। जापान में इसे जापानी प्लम कहते हैं और चीन में चीनी प्लम। लोकाट का पेड़ सदाबहार होता है। पेड़ की लंबाई प्रायः 5 से 10 मी. तक होती है। पत्तियाँ सरल 4 से 10 इंच लंबी गहरे हरे रंग की होती हैं। क्षेत्र विशेष के मौसम के अनुसार पतझड़ के मौसम में फूल आने शुरू होते हैं। फूल 2 से.मी. व्यास के सफेद पाँच पँखुड़ियों वाले होते हैं और तीन से दस फूलों के गुच्छों में लगते हैं, इनमें मीठी व मादक सुगंध होती है।

आजकल लोकाट की खेती भारत, चीन, जापान के अतिरिक्त अन्य देशों में भी की की रही है जैसे-जार्जिया, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, पाकिस्तान, न्यूजीलैंड, आदि।

 

 

 

 



बंजर मन

कुंठित धरती से

कैसे खिलेंगे।

             डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, August 21, 2026


थकित मन

चाँदनी सी शीतल

तेरी छुअन।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, August 20, 2026


 

जब चाहते हैं प्रभु, दर्शन तभी मिलते हैं।

हम में कहाँ सामर्थ्य है, तीर्थ हम कर पायें।।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

  

Wednesday, August 19, 2026


चपलता से

घुटरून चलत

दौड़ते राम।

                      डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, August 18, 2026


जलता दिया

मिट्टी का या सोने का

एक समान।

                            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, August 17, 2026


सादा पत्थर

पूजा  तुमने, तभी

बना है 'शिव'।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग