Wednesday, April 1, 2026


दो घड़ी ठहर कर

जीवन की नदी को

बहते देखना है

कविता वहीं कहीं है।

             प्रसून जोशी 

Tuesday, March 31, 2026


सिंहासन पे

राम की पादुकायें

राम वन में।

                     डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, March 30, 2026


प्यार की ज्योत से आलोकित है अंतर्मन,

बहती हैं ज्ञान की नित नयी निर्मल धारायें।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, March 29, 2026


छूटी लगाम

दौड़े मन के घोड़े

टूटा संयम।

                  डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, March 28, 2026


धागे में पिरे

माला बन गये ये

मोती निराले।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, March 27, 2026


मित्र वो सच्चा

आईना बनकर

साथ निभाता।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 


 
27 मार्च, 2026 रामनवमी की हार्दिक शुभकामनायें