Wednesday, June 17, 2026


महका घर

खिली मधु-मालती

या खिला मन।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, June 16, 2026

 


लीची

डॉ. मंजूश्री गर्ग

लीची एक मधुर ड्रूप फल है जो गर्मियों के मौसम में आता है। इसका वैज्ञानिक नाम Litchi Chinensis है। इसका मूल उत्पत्ति स्थान चीन माना जाता है। यह ऊष्णकटिबन्धीय फल है। यह मैडागास्कर, नेपाल, भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, थाइलैंड, फिलीपींस, आदि देशों में पाया जाता है। भारत में सबसे ज्यादा लीची के बाग उत्तराखण्ड के देहरादून में हैं।

 

लीची का पेड़ सदाबहार पेड़ हैं जो कि 15 से 20 मी. तक ऊँचा होता है और पत्तियाँ लगभग 15 से 25 से. मी. लम्बी व पतली होती हैं जिनमें स्निग्धता होती है, देखने में बहुत सुन्दर लगती हैं। फूल छोटे हरे, सफेद या पीले रंग के सुगंधित होते हैं जो लगभग 30 से. मी. लम्बी पैनिकल पर लगते हैं। फूल आने के लगभग तीन महीने के बाद फल लगता है। भारत में मई, जून के महीने में फल आता है। फल का बाहरी छिलका मैरून रंग का होत है जो आसानी से हट जाता है। फल के अंदर दूधिया रंग का मीठा, रसयुक्त गूदा होता है लीची का यही भाग खाने योग्य होता है। फल के बीच में भूरे रंग की गुठली होती है। लीची में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

 

 

 

 

Monday, June 15, 2026


काटे पत्थर

पत्थरों से फूटती

जल धारायें।

                        डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, June 14, 2026

 


        मन तो बाबरा पंछी है।

        जिस डाल से उड़ाओ उसी पे आ बैठता है।

                                            डॉ. मंजूश्री गर्ग

Saturday, June 13, 2026


आड़ू


 डॉ. मंजूश्री गर्ग

आड़ू को अंग्रेजी में(Peach) कहते हैं। इसका वानस्पतिक नाम प्रूनस पर्सिका है। कुछ वैज्ञानिक आड़ू की उत्पत्ति स्थान चीन मानते हैं और कुछ ईरान। यह पतझड़ी वृक्ष है। भारत में पर्वतीय व उपपर्वतीय भागों में इसकी सफल खेती होती है। इसका फल देखने में बहुत कुछ खुबानी जैसा लगता है। आकार में खुबानी से थोड़ा बड़ा होता है व हल्के हरे या हल्के पीले रंग का होता है। जहाँ धूप पड़ती है वहाँ का रंग हल्का गुलाबी हो जाता है। आड़ू पकने पर मीठा लगता है और इसका प्रयोग केवल फल के रूप में ही किया जाता है, खुबानी की तरह मेवा की तरह नहीं। आड़ू में भी एक गुठली होती है। यह फल मैदानी भागों में गर्मियों के मौसम में अधिकांशतः पाया जाता है।

 

आड़ू के वृक्ष का प्रजनन कलिकायन द्वारा होता है। आड़ू वृक्ष के मूल तने पर अप्रैल, मई महीने में रिंग बड़िंग की जाती है। पौधे 15 से 18 फुट की दूरी पर दिसंबर, जनवरी महीने में लगाये जाते हैं। सुंदर आकार व अच्छी वृद्धि के लिये प्रति दो वर्ष में कटाई, छँटाई करनी चाहिये। अप्रैल, मई के महीने में गुलाबी सुंदर रंग के फूल आते हैं और जून के महीने में फल लगता है। प्रति वृक्ष 30 से 50 किलो लगता है। इसकी तासीर गर्म होती है। आड़ू में प्रोटीन, वसा, फाइबर, कैल्शियम, पोटेशियम, शुगर, आदि प्रचुर मात्रा में होती है।

 

 

 

 

 


Friday, June 12, 2026


निराशाओं के अँधकार होंगे दूर,

आशाओं के सूरज से ही।

                             डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, June 11, 2026


अत्याचार

जो करे या जो सहे

दोनों ही दोषी।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग