जलता दिया
मिट्टी का या सोने का
एक समान।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
लाल माणिक
सूर्य ग्रह सा तेज
नवरत्न में।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
छेड़ा जो जल
अनगिन लहरें
नदी में बनी।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
मन द्वारे पे
खिले खुशी के रंग
सजी रंगोली।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
जय श्री राम
राम-सेतु बनाया
नल-नील ने।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
दो घड़ी ठहर कर
जीवन की नदी को
बहते देखना है
कविता वहीं कहीं है।
प्रसून जोशी
सिंहासन पे
राम की पादुकायें
राम वन में।
डॉ. मंजूश्री गर्ग