छूटी लगाम
दौड़े मन के घोड़े
टूटा संयम।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
धागे में पिरे
माला बन गये ये
मोती निराले।
मित्र वो सच्चा
आईना बनकर
साथ निभाता।
पिय से मिल
मन मयूर नाचे
गाये कोयल।
चार दिन की चाँदनी से जिंदगी कटती नहीं,
जिंदगी को चाहिये हर दिन ही नहीं, हर पल उजाला।।