सिंहासन पे
राम की पादुकायें
राम वन में।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
प्यार की ज्योत से आलोकित है अंतर्मन,
बहती हैं ज्ञान की नित नयी निर्मल धारायें।
छूटी लगाम
दौड़े मन के घोड़े
टूटा संयम।
धागे में पिरे
माला बन गये ये
मोती निराले।
मित्र वो सच्चा
आईना बनकर
साथ निभाता।
पिय से मिल
मन मयूर नाचे
गाये कोयल।
चार दिन की चाँदनी से जिंदगी कटती नहीं,
जिंदगी को चाहिये हर दिन ही नहीं, हर पल उजाला।।
तुमसे मिल
जिंदगी मीठी हुई
नीम सरीखी।
भोर चहकी
इठलाई किरन
महकी क्यारी।
बदलते मौसम का हाल क्या कहिये,
सेंसेक्स की तरह चढ़ता-उतरता है पारा।
घोंसला एक
तिनके गूँथ-गूँथ
बया ने रचा।
ज्ञान दीप से
उजियारा जग में
हर युग में।
पार उतारा
केवट ने राम को
या स्वयं तरा।
पीछे ना हटें
बढ़ें, लक्ष्य की ओर
कदम तेरे।
कान्हा की छवि
सिर मोर-मुकुट
कर बाँसुरी।
राधा ही नहीं
रूप, रस, माधुरी
कान्हा के साथ।
बंद मुठ्ठी में
अनगिन सपने
लेकर आये।
अरूणिम सुबह हो तुम, सुरमई शाम हो तुम
कड़ी धूप में छाँव हो तुम
प्रिये! मनमीत हो तुम।
जिंदगी तुमसे शुरू, पूरी होगी तुमसे ही
जीवन आधार हो तुम
अंक एक है
शून्य जितने मिले
बढ़ता मान.
बातें उसकी
याद अब आती हैं
जब वो नहीं।
छूने आकाश
चल दिये परिंदे
पक्के इरादे।
आम के बाग
सौधीं सी महक औ'
मीठी सी धूप।
मैं चाहूं तो भी मुझको चैन से रहने नहीं देगा।
मेरे भीतर अगर जिंदा कोई फनकार है कोई।।
कमलेश भट्ट 'कमल'
हीरा हो तुम
तराशा है तुमको
प्यार से मैंने।
4 मार्च, 2026 हिन्दू नव वर्ष विक्रमी संवत् 2083 के प्रथम महीने(चैत्र मास) के कृष्ण पक्ष के
प्रथम दिन पर हार्दिक शुभकामनायें
होली पर्व की हार्दिक शुभकामनायें
फागुन मास
होली का त्यौहार
रंग-रंगीला।
1.
टेसू के रंग
गुझियों की मिठास।
होली के संग।
2.
चंदन हम
कोटोगे तो भी हम
देंगे सुगंध।