Thursday, April 30, 2026

 

किसने रंग

आकाश में उँडेले

रंगे बादल।

                    डॉ. मंजूश्री गर्ग

Wednesday, April 29, 2026


तेरे नयना

आईना बने मेरे

रूप निहारूँ।

                     डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, April 28, 2026


अनसुनी की

दस्तक देते रहे

फिर भी हम।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, April 27, 2026

 

बादाम

बादाम के फूल


 डॉ. मंजूश्री गर्ग

बादाम का मेवों में प्रमुख स्थान है। भारत में कशमीर में बादाम के पेड़ को राज्य पेड़ माना जाता है। प्राचीन समय से विश्व के अनेक देशों में बादाम का खाने में प्रयोग होता है। आयुर्वेद में इसे बुद्धि व नसों के लिये गुणकारी बताया गया है।बादाम का वानस्पतिक नाम- प्रूनूस डल्शिस है व अंग्रेजी में इसे आलमंड कहते हैं। बादाम का इतिहास हजारों साल पुराना है। यह रेशम मार्ग से चीन से लेकर भूमध्य सागरीय देशों तक पहुँचा। 18वीं शताब्दी में स्पेनिश पादरियों द्वारा बादाम को केलिफोर्निया (अमेरिका) पहुँचाया, जो आज दुनिया का सबसे बड़ा बादाम का उत्पादक देश है। एशिया में भारत और जापान में बादाम की खेती बहुतायत से होती है। अन्य उत्पादक देश हैं-आस्ट्रेलिया, तुर्की, चिली, यूरोपीय संघ, चीन।

वास्तव में बादाम नट नहीं है, यह ड्रूप(Drupe) या गुठलीदार फल है, इसीलिये संरचना की आधार पर इसे आड़ू, आम, खुबानी की श्रेणी में रखा जाता है। बादाम का पेड़ मध्यम आकार का होता है, इसकी ऊँचाई 4 मी. से 10 मी. तक होती है। इसकी पत्तियाँ लंबी व पतली होती हैं। इसमें बंसत ऋतु में सफेद या गुलाबी रंग के सुगंधित फूल आते हैं। मधुमक्खियों के द्वारा परागण होता है। कुछ समय पश्चात् फूल पर हरे रंग के फल लगने लगते हैं यही कच्चा बादाम है। बाहरी हरी परत मखमली होती है इसके अन्दर बादामी रंग की गुठली होती है जिसे तोड़ने पर भूरे रंग की गिरी निकलती है, इसे ही बादाम कहा जाता है। भूरे रंग की पतली परत उतारने पर अन्दर सफेद गिरी निकलती है। कच्चे बादामों का स्वाद भीगे हुये बादामों की तरह होता है। पर्वतीय क्षेत्रों में गर्मियों के मौसम में हरे बादाम बाजार में मिल जाते हैं। हरे बादाम का कच्चे आम की तरह गुठली सहित अचार डाला जाता है।

 

बादाम की तासीर गर्म और ठंडी दोनों होती है। कच्चे बादाम ऐसे ही या भूनकर, तलकर खाने पर इसकी तासीर गर्म होती है जबकि कच्चे बादाम को रातभर भिगोकर, सुबह भूरे रंग का छिलका उतार कर खाने पर इसकी तासीर ठंडी होती है। एक साल से छोटे बच्चे को एक बादाम की गिरी घिसकर देने पर फायदेमंद होती है, पीस कर देने पर भी आँतों में नुकसान हो सकता है।

 

बादाम का तेल भी निकाला जाता है। बादाम की मिठाई बनाई जाती है व अधिकांश मिठाईयों पर बादाम को लंबा-लंबा काटकर सजावट की जाती है।

  


सुबह हो रही है हँस रही है जमीं

कहीं गुम चमकते सितारे हुये।

                डॉ. रामदरश मिश्र

 

Sunday, April 26, 2026

 

रेत का घर किसी महल से कम नहीं होता किसी बच्चे के लिये।

जिसने अभी बनाया है किसी नदी के किनारे।

                                    डॉ. मंजूश्री गर्ग

 

Saturday, April 25, 2026

 

अपना नाम

तेरे मुख से सुनूँ

यही तमन्ना।

                   डॉ. मंजूश्री गर्ग

Friday, April 24, 2026


श्री गौरी पुत्र

मयूर वाहन पे

कार्तिकेय जी।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, April 23, 2026

गंगा मैय्या को शत्-शत् नमन



बैशाख मास

शुक्ल पक्ष सप्तमी

गंगा जयंती। 

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

Wednesday, April 22, 2026


कड़ी धूप में 

शरबती मुस्कान

देती ताजगी।

                       डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, April 21, 2026


राधा ही नहीं

रूप, रस, माधुरी

कान्हा के साथ।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, April 20, 2026


छोटा सा दिल

मासूम धड़कन

थामे जिंदगी।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, April 19, 2026


भावों की नावें

बहती आर-पार

सहज रिश्ते।

                           डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, April 18, 2026


अंश हो तुम

काँटा भी चुभे तुम्हें

होती चुभन।

                      डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, April 17, 2026


सत्य पे टिका

दोलायमान धर्म

डिगता नहीं।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, April 16, 2026


दीप-पतंगा

दोनों साथ जले हैं

प्रीत निभाने।

                          डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, April 15, 2026


सागर भेजे

मेघ लाये संदेशे

नदी के लिये।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, April 14, 2026

सुहाने पल

अतिथि बन आये

सदा दो पल।

                   डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, April 13, 2026


चाह नहीं मैं बूँद सी सीपी में गिरूँ औ मोती बन जाऊँ.

चाह बूँद सी सागर में गिरूँ औ उसी में समा जाऊँ।

 

                     डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, April 12, 2026


ख्बाबों में बसा

आयेगा एक दिन

आँगन मेरे।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, April 11, 2026



तांडव नृत्य

नटराज रूप में

शिव ने किया।

                    डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, April 10, 2026


जाम से नहीं

नयनों से पीकर

बहके हम।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, April 9, 2026


चिड़ियाँ जागीं

चहकी डाली सारी

हुआ सबेरा।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, April 8, 2026


'साहित्य' वही

सर्वजन हित में 

सर्वदा रहे।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, April 7, 2026


आगे तो बढ़ो

झरने की तरह

जानेंगे सब।

                   डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, April 6, 2026


जलता दिया

मिट्टी का या सोने का

एक समान।

                        डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, April 5, 2026


लाल माणिक

सूर्य ग्रह सा तेज

नवरत्न में।

                                  डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, April 4, 2026


छेड़ा जो जल

अनगिन लहरें

नदी में बनी।

                      डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, April 3, 2026


मन द्वारे पे

खिले खुशी के रंग

सजी रंगोली।

                       डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, April 2, 2026


जय श्री राम

राम-सेतु बनाया

नल-नील ने।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, April 1, 2026


दो घड़ी ठहर कर

जीवन की नदी को

बहते देखना है

कविता वहीं कहीं है।

             प्रसून जोशी