Tuesday, May 26, 2026


'चाहत' की नई किताब लिखेंगे।

तुम मिलो या ना मिलो 'आस' रखेंगे।।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग

 

Monday, May 25, 2026


नन्हें कदम

थाम के हाथ माँ का

बढ़ने लगे।

                         डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, May 24, 2026

 

बैष्णों देवी माँ

त्रिकुट पर्वत पे

सदा विराजें।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

Wednesday, May 20, 2026


मीठा जल भी 

सागर में मिल के 

खारा ही खारा।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

Tuesday, May 19, 2026


धूल नहीं ये

हल्दी सी है बिखरी

आज हवा में। *

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

*4-6-2010 का प्रकृति का दृश्य, जब वातावरण में चारों तरफ हवा में पीला रंग धूल में मिला हुआ था

Monday, May 18, 2026


बच्चे आँगन

फुलवारी है खिली 

महके मन।

                               डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, May 17, 2026


मन द्वारे पे

खिले खुशी के रंग

सजी रंगोली।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, May 16, 2026


'आम' हैं आप

खास 'आम' हैं पर

'आमों' के बीच।

                   डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, May 15, 2026


भाल पे होंठ किसने रखे

जिंदगी में महावर घुली।

दृष्टि वो बन गई बाँसुरी

देह ये हो चली गोकुली।

                शिवओम अम्बर 

Thursday, May 14, 2026


साँसों में बसा लो खुशबू की तरह

महका  करेंगे  तेरे  आंगन में। 

                डॉ. मंजूश्री गर्ग

Wednesday, May 13, 2026


तुमसे मिल

जिंदगी मीठी हुई

नीम सरीखी।

                            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, May 12, 2026


अटल हैं जो

अडिग हैं इरादे

ध्रुव हैं वही।

                        डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, May 11, 2026


एक औ' एक

दो नहीं, हैं ग्यारह

साथ मिलें तो।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, May 10, 2026


उससे हारी दुनिया सारी,

खुद से जो भी जीत गया।

                देवेन्द्र माँझी 

Saturday, May 9, 2026


यौवन की देहरी पे

सजी लाज की कनातें

प्रिय के स्वागत में

मुस्कानों के फूल सजे।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, May 8, 2026


बूँद-बूँद से समुद्र बने

फूल-फूल से उपवन

तुम अपने को कम

मत समझो, तुमसे ही

देश और विश्व बने।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, May 7, 2026


जो पल जिया

खुशी से, अपना है।

बाकी बेगाने।

                 डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, May 6, 2026


ठहरी बूँद

सीपी सम पाती में

मोती सी सजी।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, May 5, 2026


दिल से, आँखों से, किसी ठौर से देखा ना गया।

वो उजाला था, मगर गौर से देखा ना गया।।

                डॉ. कुअँर बेचैन 

Monday, May 4, 2026


ता उम्र बँधे

कच्चे धागे की डोर

कितनी दृढ़!

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, May 3, 2026


कंकड़ ने बनाये, अनगिन वृत्त।

मन मेरा, पानी सा तरल।।

                     डॉ. मंजूश्री गर्ग

 

 

 

 

 

  

Saturday, May 2, 2026


गंगा, यमुना

औ' सरस्वती मिलें

संगम तीर्थ।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, May 1, 2026


रात भोली सी

और अनूठे दिन

बचपन में।

                      डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, April 30, 2026

 

किसने रंग

आकाश में उँडेले

रंगे बादल।

                    डॉ. मंजूश्री गर्ग

Wednesday, April 29, 2026


तेरे नयना

आईना बने मेरे

रूप निहारूँ।

                     डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, April 28, 2026


अनसुनी की

दस्तक देते रहे

फिर भी हम।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, April 27, 2026

 

बादाम

बादाम के फूल


 डॉ. मंजूश्री गर्ग

बादाम का मेवों में प्रमुख स्थान है। भारत में कशमीर में बादाम के पेड़ को राज्य पेड़ माना जाता है। प्राचीन समय से विश्व के अनेक देशों में बादाम का खाने में प्रयोग होता है। आयुर्वेद में इसे बुद्धि व नसों के लिये गुणकारी बताया गया है।बादाम का वानस्पतिक नाम- प्रूनूस डल्शिस है व अंग्रेजी में इसे आलमंड कहते हैं। बादाम का इतिहास हजारों साल पुराना है। यह रेशम मार्ग से चीन से लेकर भूमध्य सागरीय देशों तक पहुँचा। 18वीं शताब्दी में स्पेनिश पादरियों द्वारा बादाम को केलिफोर्निया (अमेरिका) पहुँचाया, जो आज दुनिया का सबसे बड़ा बादाम का उत्पादक देश है। एशिया में भारत और जापान में बादाम की खेती बहुतायत से होती है। अन्य उत्पादक देश हैं-आस्ट्रेलिया, तुर्की, चिली, यूरोपीय संघ, चीन।

वास्तव में बादाम नट नहीं है, यह ड्रूप(Drupe) या गुठलीदार फल है, इसीलिये संरचना की आधार पर इसे आड़ू, आम, खुबानी की श्रेणी में रखा जाता है। बादाम का पेड़ मध्यम आकार का होता है, इसकी ऊँचाई 4 मी. से 10 मी. तक होती है। इसकी पत्तियाँ लंबी व पतली होती हैं। इसमें बंसत ऋतु में सफेद या गुलाबी रंग के सुगंधित फूल आते हैं। मधुमक्खियों के द्वारा परागण होता है। कुछ समय पश्चात् फूल पर हरे रंग के फल लगने लगते हैं यही कच्चा बादाम है। बाहरी हरी परत मखमली होती है इसके अन्दर बादामी रंग की गुठली होती है जिसे तोड़ने पर भूरे रंग की गिरी निकलती है, इसे ही बादाम कहा जाता है। भूरे रंग की पतली परत उतारने पर अन्दर सफेद गिरी निकलती है। कच्चे बादामों का स्वाद भीगे हुये बादामों की तरह होता है। पर्वतीय क्षेत्रों में गर्मियों के मौसम में हरे बादाम बाजार में मिल जाते हैं। हरे बादाम का कच्चे आम की तरह गुठली सहित अचार डाला जाता है।

 

बादाम की तासीर गर्म और ठंडी दोनों होती है। कच्चे बादाम ऐसे ही या भूनकर, तलकर खाने पर इसकी तासीर गर्म होती है जबकि कच्चे बादाम को रातभर भिगोकर, सुबह भूरे रंग का छिलका उतार कर खाने पर इसकी तासीर ठंडी होती है। एक साल से छोटे बच्चे को एक बादाम की गिरी घिसकर देने पर फायदेमंद होती है, पीस कर देने पर भी आँतों में नुकसान हो सकता है।

 

बादाम का तेल भी निकाला जाता है। बादाम की मिठाई बनाई जाती है व अधिकांश मिठाईयों पर बादाम को लंबा-लंबा काटकर सजावट की जाती है।

  


सुबह हो रही है हँस रही है जमीं

कहीं गुम चमकते सितारे हुये।

                डॉ. रामदरश मिश्र

 

Sunday, April 26, 2026

 

रेत का घर किसी महल से कम नहीं होता किसी बच्चे के लिये।

जिसने अभी बनाया है किसी नदी के किनारे।

                                    डॉ. मंजूश्री गर्ग

 

Saturday, April 25, 2026

 

अपना नाम

तेरे मुख से सुनूँ

यही तमन्ना।

                   डॉ. मंजूश्री गर्ग

Friday, April 24, 2026


श्री गौरी पुत्र

मयूर वाहन पे

कार्तिकेय जी।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, April 23, 2026

गंगा मैय्या को शत्-शत् नमन



बैशाख मास

शुक्ल पक्ष सप्तमी

गंगा जयंती। 

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

Wednesday, April 22, 2026


कड़ी धूप में 

शरबती मुस्कान

देती ताजगी।

                       डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, April 21, 2026


राधा ही नहीं

रूप, रस, माधुरी

कान्हा के साथ।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, April 20, 2026


छोटा सा दिल

मासूम धड़कन

थामे जिंदगी।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, April 19, 2026


भावों की नावें

बहती आर-पार

सहज रिश्ते।

                           डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, April 18, 2026


अंश हो तुम

काँटा भी चुभे तुम्हें

होती चुभन।

                      डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, April 17, 2026


सत्य पे टिका

दोलायमान धर्म

डिगता नहीं।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, April 16, 2026


दीप-पतंगा

दोनों साथ जले हैं

प्रीत निभाने।

                          डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, April 15, 2026


सागर भेजे

मेघ लाये संदेशे

नदी के लिये।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, April 14, 2026

सुहाने पल

अतिथि बन आये

सदा दो पल।

                   डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, April 13, 2026


चाह नहीं मैं बूँद सी सीपी में गिरूँ औ मोती बन जाऊँ.

चाह बूँद सी सागर में गिरूँ औ उसी में समा जाऊँ।

 

                     डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, April 12, 2026


ख्बाबों में बसा

आयेगा एक दिन

आँगन मेरे।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, April 11, 2026



तांडव नृत्य

नटराज रूप में

शिव ने किया।

                    डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, April 10, 2026


जाम से नहीं

नयनों से पीकर

बहके हम।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, April 9, 2026


चिड़ियाँ जागीं

चहकी डाली सारी

हुआ सबेरा।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, April 8, 2026


'साहित्य' वही

सर्वजन हित में 

सर्वदा रहे।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, April 7, 2026


आगे तो बढ़ो

झरने की तरह

जानेंगे सब।

                   डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, April 6, 2026


जलता दिया

मिट्टी का या सोने का

एक समान।

                        डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, April 5, 2026


लाल माणिक

सूर्य ग्रह सा तेज

नवरत्न में।

                                  डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, April 4, 2026


छेड़ा जो जल

अनगिन लहरें

नदी में बनी।

                      डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, April 3, 2026


मन द्वारे पे

खिले खुशी के रंग

सजी रंगोली।

                       डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, April 2, 2026


जय श्री राम

राम-सेतु बनाया

नल-नील ने।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, April 1, 2026


दो घड़ी ठहर कर

जीवन की नदी को

बहते देखना है

कविता वहीं कहीं है।

             प्रसून जोशी 

Tuesday, March 31, 2026


सिंहासन पे

राम की पादुकायें

राम वन में।

                     डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, March 30, 2026


प्यार की ज्योत से आलोकित है अंतर्मन,

बहती हैं ज्ञान की नित नयी निर्मल धारायें।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, March 29, 2026


छूटी लगाम

दौड़े मन के घोड़े

टूटा संयम।

                  डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, March 28, 2026


धागे में पिरे

माला बन गये ये

मोती निराले।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, March 27, 2026


मित्र वो सच्चा

आईना बनकर

साथ निभाता।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 


 
27 मार्च, 2026 रामनवमी की हार्दिक शुभकामनायें

Wednesday, March 25, 2026



शत्-शत् नमन माँ को सदा हम करते हैं
 ज्योति माँ के चरणों में सदा जलती रहे
औ' शंख-ध्वनि सदा गूँजती रहे।
कृपा दृष्टि सदा माँ बनाये रखना,
हमारे मन में ज्ञान ज्योति सदा जलती रहे।
            
                डॉ. मंजूश्री गर्ग


 

Tuesday, March 24, 2026


पिय से मिल 

मन मयूर नाचे

गाये कोयल।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, March 23, 2026


चार दिन की चाँदनी से जिंदगी कटती नहीं,

जिंदगी को चाहिये हर दिन ही नहीं, हर पल उजाला।। 

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

Sunday, March 22, 2026


तुमसे मिल

जिंदगी मीठी हुई

नीम सरीखी।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, March 21, 2026


भोर चहकी

इठलाई किरन

महकी क्यारी।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, March 20, 2026

 

बदलते मौसम का हाल क्या कहिये,

सेंसेक्स की तरह चढ़ता-उतरता है पारा।

                    डॉ. मंजूश्री गर्ग

Thursday, March 19, 2026


घोंसला एक

तिनके गूँथ-गूँथ

बया ने रचा।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, March 18, 2026


ज्ञान दीप से

उजियारा जग में

हर युग में।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, March 17, 2026


पार उतारा

केवट ने राम को

या स्वयं तरा।


            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, March 16, 2026


गेहूँ के खेत
लहलहाती बाली
सोने सी लगी।
            
        डॉ. मंजूश्री गर्ग

 

Sunday, March 15, 2026


पीछे ना हटें

बढ़ें, लक्ष्य की ओर

कदम तेरे।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, March 14, 2026


कान्हा की छवि

सिर मोर-मुकुट

कर बाँसुरी।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, March 13, 2026


राधा ही नहीं

रूप, रस, माधुरी

कान्हा के साथ।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, March 12, 2026


बंद मुठ्ठी में 

अनगिन सपने

लेकर आये।

                         डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, March 11, 2026


अरूणिम सुबह हो तुम, सुरमई शाम हो तुम

                           कड़ी धूप में छाँव हो तुम

                                प्रिये! मनमीत हो तुम।


जिंदगी तुमसे शुरू, पूरी होगी तुमसे ही

                        जीवन आधार हो तुम

                              प्रिये! मनमीत हो तुम।

                                            डॉ. मंजूश्री गर्ग

 

Tuesday, March 10, 2026


अंक एक है

शून्य जितने मिले

बढ़ता मान.

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, March 9, 2026


बातें उसकी

याद अब आती हैं

जब वो नहीं।

                        डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, March 8, 2026


छूने आकाश

चल दिये परिंदे

पक्के इरादे।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, March 7, 2026


आम के बाग

सौधीं सी महक औ'

मीठी सी धूप। 

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

Friday, March 6, 2026


मैं चाहूं तो भी मुझको चैन से रहने नहीं देगा।

मेरे भीतर अगर जिंदा कोई फनकार है कोई।।

                कमलेश भट्ट 'कमल' 

Thursday, March 5, 2026


हीरा हो तुम

तराशा है तुमको

प्यार से मैंने।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, March 4, 2026


4 मार्च, 2026 हिन्दू नव वर्ष विक्रमी संवत् 2083 के प्रथम महीने(चैत्र मास) के कृष्ण पक्ष के 

प्रथम  दिन पर हार्दिक शुभकामनायें


Tuesday, March 3, 2026

 


बिन बादल
इंद्रधनुष बने
होली के दिन।
                डॉ. मंजूश्री गर्ग


Monday, March 2, 2026


होली पर्व की हार्दिक शुभकामनायें 

फागुन मास

होली का त्यौहार

रंग-रंगीला।

1.


टेसू के रंग

गुझियों की मिठास।

होली के संग।

2.

        डॉ. मंजूश्री गर्ग

Sunday, March 1, 2026


चंदन हम

कोटोगे तो भी हम

देंगे सुगंध।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, February 28, 2026


कन्हैया हो तुम

तुम्हीं कान्हा हो, कन्हैया हो तुम।

तुम्हीं नन्दलाला, वासुदेव हो तुम।

तुम्हीं माखनचोर, चितचोर हो तुम।

तुम्हीं बाँसुरी वादक, सुदर्शन चक्रधारी हो तुम।

गोपों संग ग्वाला, गोपियों की प्रीत हो तुम।

राधा के मनमीत, द्वारकाधीश रूक्मिणी के।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

 

Friday, February 27, 2026


कभी ओला, कभी बारिश,

कभी धनकती धूप।

रोमांच से भरा है

फरवरी का मौसम।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, February 26, 2026


जिंदगी की पतवार तुम ही।

उस पार लगा दो तुम ही।।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, February 25, 2026


 लठ्ठमार होली

कान्हा खेल रहे होली  वृन्दावन में,

राधा राह तके बरसाने में।

आयेगी कान्हा की टोली जब,

लेंगें रंग के साथ खबर लाठी सेे।

कह रही सखियाँ राधा से,

खेलेंगे सब मिल लठ्ठमार होली बरसाने में।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग

Tuesday, February 24, 2026

 

बारह महीना-बसंत

                     डॉ. मंजूश्री गर्ग

बसंत तो हमारे मन में है

बारह महीने रहता है

बस उसे महसूस करना है

आनंद का अनुभव करना है.

 

ग्रीष्म ऋतु में

शीतल पेय और आइसक्रीम

मधुर मुस्कान लाते हैं.

कौन कहता है! ग्रीष्म ऋतु शुष्क ऋतु है

खरबूजे, तरबूज की सरसता

इसी ऋतु में मिलती है.

 

बर्षा ऋतु तो

है पावस ऋतु

चारों ओर हरियाली

भीगी-भीगी हवा

पत्तों से झरता पानी

मन लुभाते ही हैं.

पायस फल आम भी

इसी ऋतु में सरसता भरता है.

 

शरद ऋतु तो

है ही पावन ऋतु

मंद-मंद समीर

स्वच्छ चाँदनी

वृक्षों से झरते

हारसिंगार के फूल

मन में मादकता भरते ही हैं

 

शिशिर ऋतु भी

नहीं है कम सुहावनि

सखियों संग

धूप में चौपालें

रात गये चाय-कॉफी की पार्टी

मेवा की गुटरगूँ

गन्ने की मिठास

इसी मौसम की

सौगातें हैं

 

हेमन्त ऋतु है

ले आती है संदेश बसंत का.

अनायास ही

झड़ते पेड़ों से पत्ते

खेतों में खिलने लगते

सरसों के फूल

सोये हुये अरमान

जागने लगते

फिर एक बार

 

बसन्त ऋतु तो

है बसंत ऋतु

प्रकृति के कण-कण में

नव आनंद, नव उत्साह

नजर आने लगता है.

वृक्ष नये परिधान पहन सज जाते हैं

वहीं पशु-पक्षी ही क्या

वन-तड़ाग तक नव उत्साह से

भर जाते हैं फिर एक बार.

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Monday, February 23, 2026

 

 सीता की प्रतिज्ञाः

                         डॉ. मंजूश्री गर्ग

शूल नहीं चुभे थे कभी

कंटक भरी राहों में,

क्योंकि तुम साथ थे.

रावण की लंका में भी

रही थी सुकून से

क्योंकि तुम साथ थे.

 

आज अकारण ही

निर्वासित किया है तुमने

जानते हुये भी कि

गर्भ में तुम्हारा ही अंश है.

 

बहुत ही अकेली

महसूस कर रही हूँ

मैं जग में.

अपनी ही परछाईं से

डर रही हूँ

मैं वन में.

 

आज राम तुमने नहीं!

मैंने निर्वासित किया है

तुम्हें ह्रदय से.

भूमि से जन्मी हूँ

भूमि में समा जाऊँगी

पर वापस तुम्हारी

अयोध्या में

कभी नहीं आऊँगी.

 

श्रीराम के उद्गारः

 

सीते! वृथा व्यथित होती हो प्रिये!

तुम्हारा राम तो तुम्हारे साथ है।

मृदुल, सौम्य राम तुम्हारे साथ ही

निर्वासित हुआ है अयोध्या से।

 

अयोध्या में तो अयोध्या की निष्ठूर प्रजा का

निष्ठूर राजा राम है, ह्रदयहीन राम है।

तुम बिन अयोध्या ही नहीं,

श्रीहीन है अयोध्या का राजसिंहासन भी।

वंदनीय राम दरबार की वही झाँकी होगी

जहाँ तुम विराजती हो सस्मित राम के वाम अंग।