'चाहत' की नई किताब लिखेंगे।
तुम मिलो या ना मिलो 'आस' रखेंगे।।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
बादाम
बादाम के फूल
बादाम का मेवों में प्रमुख स्थान है। भारत में
कशमीर में बादाम के पेड़ को राज्य पेड़ माना जाता है। प्राचीन समय से विश्व के
अनेक देशों में बादाम का खाने में प्रयोग होता है। आयुर्वेद में इसे बुद्धि व नसों
के लिये गुणकारी बताया गया है।बादाम का वानस्पतिक नाम- प्रूनूस डल्शिस है व
अंग्रेजी में इसे आलमंड कहते हैं। बादाम का इतिहास हजारों साल पुराना है। यह रेशम
मार्ग से चीन से लेकर भूमध्य सागरीय देशों तक पहुँचा। 18वीं शताब्दी में स्पेनिश
पादरियों द्वारा बादाम को केलिफोर्निया (अमेरिका) पहुँचाया, जो आज दुनिया का सबसे
बड़ा बादाम का उत्पादक देश है। एशिया में भारत और जापान में बादाम की खेती बहुतायत
से होती है। अन्य उत्पादक देश हैं-आस्ट्रेलिया, तुर्की, चिली, यूरोपीय संघ, चीन।
वास्तव में बादाम नट नहीं है, यह ड्रूप(Drupe) या गुठलीदार फल है, इसीलिये संरचना की आधार पर
इसे आड़ू, आम, खुबानी की श्रेणी में रखा जाता है। बादाम का पेड़ मध्यम आकार का
होता है, इसकी ऊँचाई 4 मी. से 10 मी. तक होती है। इसकी पत्तियाँ लंबी व पतली होती
हैं। इसमें बंसत ऋतु में सफेद या गुलाबी रंग के सुगंधित फूल आते हैं। मधुमक्खियों
के द्वारा परागण होता है। कुछ समय पश्चात् फूल पर हरे रंग के फल लगने लगते हैं यही
कच्चा बादाम है। बाहरी हरी परत मखमली होती है इसके अन्दर बादामी रंग की गुठली होती
है जिसे तोड़ने पर भूरे रंग की गिरी निकलती है, इसे ही बादाम कहा जाता है। भूरे
रंग की पतली परत उतारने पर अन्दर सफेद गिरी निकलती है। कच्चे बादामों का स्वाद
भीगे हुये बादामों की तरह होता है। पर्वतीय क्षेत्रों में गर्मियों के मौसम में
हरे बादाम बाजार में मिल जाते हैं। हरे बादाम का कच्चे आम की तरह गुठली सहित अचार
डाला जाता है।
बादाम की तासीर गर्म और ठंडी दोनों होती है।
कच्चे बादाम ऐसे ही या भूनकर, तलकर खाने पर इसकी तासीर गर्म होती है जबकि कच्चे
बादाम को रातभर भिगोकर, सुबह भूरे रंग का छिलका उतार कर खाने पर इसकी तासीर ठंडी
होती है। एक साल से छोटे बच्चे को एक बादाम की गिरी घिसकर देने पर फायदेमंद होती
है, पीस कर देने पर भी आँतों में नुकसान हो सकता है।
बादाम का तेल भी निकाला जाता है। बादाम की मिठाई
बनाई जाती है व अधिकांश मिठाईयों पर बादाम को लंबा-लंबा काटकर सजावट की जाती है।
बारह महीना-बसंत
डॉ. मंजूश्री गर्ग
बसंत तो हमारे मन में है
बारह महीने रहता है
बस उसे महसूस करना है
आनंद का अनुभव करना है.
ग्रीष्म ऋतु में
शीतल पेय और आइसक्रीम
मधुर मुस्कान लाते हैं.
कौन कहता है! ग्रीष्म ऋतु शुष्क ऋतु है
खरबूजे, तरबूज की सरसता
इसी ऋतु में मिलती है.
बर्षा ऋतु तो
है पावस ऋतु
चारों ओर हरियाली
भीगी-भीगी हवा
पत्तों से झरता पानी
मन लुभाते ही हैं.
पायस फल आम भी
इसी ऋतु में सरसता भरता है.
शरद ऋतु तो
है ही पावन ऋतु
मंद-मंद समीर
स्वच्छ चाँदनी
वृक्षों से झरते
हारसिंगार के फूल
मन में मादकता भरते ही हैं
शिशिर ऋतु भी
नहीं है कम सुहावनि
सखियों संग
धूप में चौपालें
रात गये चाय-कॉफी की पार्टी
मेवा की गुटरगूँ
गन्ने की मिठास
इसी मौसम की
सौगातें हैं
हेमन्त ऋतु है
ले आती है संदेश बसंत का.
अनायास ही
झड़ते पेड़ों से पत्ते
खेतों में खिलने लगते
सरसों के फूल
सोये हुये अरमान
जागने लगते
फिर एक बार
बसन्त ऋतु तो
है बसंत ऋतु
प्रकृति के कण-कण में
नव आनंद, नव उत्साह
नजर आने लगता है.
वृक्ष नये परिधान पहन सज जाते हैं
वहीं पशु-पक्षी ही क्या
वन-तड़ाग तक नव उत्साह से
भर जाते हैं फिर एक बार.
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सीता की प्रतिज्ञाः
शूल नहीं चुभे
थे कभी
कंटक भरी राहों
में,
क्योंकि तुम
साथ थे.
रावण की लंका
में भी
रही थी सुकून
से
क्योंकि तुम
साथ थे.
आज अकारण ही
निर्वासित किया
है तुमने
जानते हुये भी
कि
गर्भ में
तुम्हारा ही अंश है.
बहुत ही अकेली
महसूस कर रही
हूँ
मैं जग में.
अपनी ही परछाईं
से
डर रही हूँ
मैं वन में.
आज राम तुमने
नहीं!
मैंने
निर्वासित किया है
तुम्हें ह्रदय
से.
भूमि से जन्मी
हूँ
भूमि में समा
जाऊँगी
पर वापस
तुम्हारी
अयोध्या में
कभी नहीं
आऊँगी.
श्रीराम के उद्गारः
सीते! वृथा व्यथित होती हो प्रिये!
तुम्हारा राम
तो तुम्हारे साथ है।
मृदुल, सौम्य
राम तुम्हारे साथ ही
निर्वासित हुआ
है अयोध्या से।
अयोध्या में तो
अयोध्या की निष्ठूर प्रजा का
निष्ठूर राजा
राम है, ह्रदयहीन राम है।
तुम बिन
अयोध्या ही नहीं,
श्रीहीन है
अयोध्या का राजसिंहासन भी।
वंदनीय राम
दरबार की वही झाँकी होगी
जहाँ तुम विराजती हो सस्मित राम के वाम अंग।