Friday, July 31, 2026


उखड़ेंगे ना

दूब से जुड़े हुये

हम धरा से।

                  डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, July 30, 2026



बम-बम भोले के जय घोष से गूँज रहा है आकाश।

भर-भर काँवर गंगा जल से चल दिये हैं काँवड़िये।।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

 

 

 

  

Wednesday, July 29, 2026


स्वस्तिक और

चहुँमुखी दीपक

एक समान।

                   डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, July 28, 2026


जलकर भी

कहाँ बाती जलती!

जलता दिया।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, July 27, 2026


घनी अँधेरी

बरसात की रातें

डरे है मन।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, July 26, 2026


चन्द्र खिलौना

राम हों या श्री कृष्ण

किसने पाया।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

Saturday, July 25, 2026

 

चिरौंजी

डॉ. मंजूश्री गर्ग

चिरोली या चिरौंजी चिरोली(पियाल) वृक्ष के फल की गुठली की गिरी है जो मेवे के रूप में प्रयोग होती है। यह मधुर बल वर्धक, ह्रदय के लिये उत्तम, स्निग्ध, वात पित्त शामक होती है। अधिकतर मीठे पकवानों जैसे खीर, सेवईं, लड्डू, बर्फी, रबड़ी, कलाकंद, आदि में डाली जाती है।

चिरौंजी के फल को चार या पियाल भी कहते हैं। इसके पेड़ अमतौर पर शुष्क पर्णपाती पर्वतीय जंगलों में पाये जाते है। इसके वृक्षों की लंबाई 50 फीट से 60 फीट के आसपास होती हैं। इसकी पत्तियाँ 6 से 8 इंच लंबी होती हैं आगे से गोलाकार होती हैं। पेड़ पर 3 से 4 से.मी. व्यास के हरे रंग के गोल फल लगते हैं जो पकने पर गहरे बैंगनी और काले रंग के हो जाते हैं। फल के अंदर कठोर गुठली होती है जिसे तोड़कर गिरी निकलती है।

भारत में चिरोली के वृक्ष दक्षिण भारत, उड़ीसा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छोटा नागपुर, आदि स्थानों में पाये जाते हैं।

 

Friday, July 24, 2026


मुस्कुराते सूरज से

तुम आये जीवन में

लालिमा तुमसे ही

खिले  मन  मेरा

सूरजमुखी  सा।

             डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, July 23, 2026


टोक देता है कदम जब भी गलत उठता है

ऐसा लगता है कोई मुझसे बड़ा है मुझमें।

            कृष्ण बिहारी 'नूर' 

Wednesday, July 22, 2026


सजे हिंडोले

झूले हैं राधा-कृष्ण

वृन्दावन में।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, July 21, 2026


कलियुग में

साम्राज्य झूठ का

सच की हार।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, July 20, 2026


बिन थामे ही हाथ, हमेशा

थामे रहते हाथ हमारा।

कैसे कह दें? साथ नहीं हो

पल-पल साथ निभाते हो।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

 

  

Sunday, July 19, 2026


खुशी के पल

धूप खिली आँगन

छँटा कोहरा।

                       डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, July 18, 2026


बनोगे संत

अहंकार अपना

तोड़ो तो सही.

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, July 17, 2026

आज की बातें

बीते युग की बातें

होनी हैं कल।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, July 16, 2026


सरसे धरा

बूँद-बूँद बरसे

सारा ही दिन।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, July 15, 2026


अधर द्वार

दीप राम नाम का

रोशन मन।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग


 

Tuesday, July 14, 2026


नयनों से नयनों तक अविरल

बहती रहे दर्श की धारा

सुर्ख हथेली पर उंगली  से

लिखते रहना नाम तुम्हारा।


बारम्बार इस तरह तुमको

लिखने में कुछ बात और है।

            कृष्ण शलभ

Monday, July 13, 2026


अँधेरी रात

कठिन डगर है

सम्बल तेरा।

                       डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, July 12, 2026


चलो तो सही

 पगडंडी खुद ही 

जायेगी बन।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

Saturday, July 11, 2026


सत्य पे टिका

दोलायमान धर्म

डिगता नहीं।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, July 10, 2026


 प्यार-सम्मान

शामिल हों अगर

महकें रिश्ते।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

Thursday, July 9, 2026


उखड़ेंगे ना

दूब से जुड़े हुये

हम धरा सा।

                    डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, July 8, 2026


तेरे ध्यान में,

या गुम अपने में।

मालूम नहीं?

                  डॉ. मंजूश्री गर्ग

Tuesday, July 7, 2026


बिहारी जी की

वृन्दावन में राजे

मृदु मुस्कान।

        डॉ. मंजूश्री गर्ग

Monday, July 6, 2026


ज्ञान का दीप

मन में जलाकर

फैलायें ज्ञान।

                       डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, July 5, 2026


सजे द्वार पे

तोरण औ' कलश

'शुभागमन'। 

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

Saturday, July 4, 2026

 

जल ही--------

 

जल ही जीवन

सिंचित उपवन

खिलते फूल।

 

जल ही धार

कटते पत्थर

बनते रेत।

 

जल ही ताप

बनती ऊर्जा

जलते बल्ब।

 

      डॉ. मंजूश्री गर्ग


Friday, July 3, 2026


देव, मानव

अपनी सीमाओं में

बँधे दोनों ही।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, July 2, 2026


नई आशायें

अंकुरित हैं बीज

नये युग के।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, July 1, 2026


आओ कान्हा!

मन धीर ना धरे

तुम्हारे बिन।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग