चिरौंजी
डॉ. मंजूश्री गर्ग
चिरोली या चिरौंजी चिरोली(पियाल) वृक्ष के फल की
गुठली की गिरी है जो मेवे के रूप में प्रयोग होती है। यह मधुर बल वर्धक, ह्रदय के
लिये उत्तम, स्निग्ध, वात पित्त शामक होती है। अधिकतर मीठे पकवानों जैसे खीर, सेवईं,
लड्डू, बर्फी, रबड़ी, कलाकंद, आदि में डाली जाती है।
चिरौंजी के फल को चार या पियाल भी कहते हैं।
इसके पेड़ अमतौर पर शुष्क पर्णपाती पर्वतीय जंगलों में पाये जाते है। इसके वृक्षों
की लंबाई 50 फीट से 60 फीट के आसपास होती हैं। इसकी पत्तियाँ 6 से 8 इंच लंबी होती
हैं आगे से गोलाकार होती हैं। पेड़ पर 3 से 4 से.मी. व्यास के हरे रंग के गोल फल
लगते हैं जो पकने पर गहरे बैंगनी और काले रंग के हो जाते हैं। फल के अंदर कठोर
गुठली होती है जिसे तोड़कर गिरी निकलती है।
भारत में चिरोली के वृक्ष दक्षिण भारत, उड़ीसा,
हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छोटा नागपुर, आदि स्थानों में पाये जाते हैं।
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