Tuesday, July 14, 2026


नयनों से नयनों तक अविरल

बहती रहे दर्श की धारा

सुर्ख हथेली पर उंगली  से

लिखते रहना नाम तुम्हारा।


बारम्बार इस तरह तुमको

लिखने में कुछ बात और है।

            कृष्ण शलभ

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