नयनों से नयनों तक अविरल
बहती रहे दर्श की धारा
सुर्ख हथेली पर उंगली से
लिखते रहना नाम तुम्हारा।
बारम्बार इस तरह तुमको
लिखने में कुछ बात और है।
कृष्ण शलभ
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