आड़ू
डॉ. मंजूश्री गर्ग
आड़ू को अंग्रेजी में(Peach) कहते हैं। इसका वानस्पतिक नाम प्रूनस पर्सिका
है। कुछ वैज्ञानिक आड़ू की उत्पत्ति स्थान चीन मानते हैं और कुछ ईरान। यह पतझड़ी
वृक्ष है। भारत में पर्वतीय व उपपर्वतीय भागों में इसकी सफल खेती होती है। इसका फल
देखने में बहुत कुछ खुबानी जैसा लगता है। आकार में खुबानी से थोड़ा बड़ा होता है व
हल्के हरे या हल्के पीले रंग का होता है। जहाँ धूप पड़ती है वहाँ का रंग हल्का
गुलाबी हो जाता है। आड़ू पकने पर मीठा लगता है और इसका प्रयोग केवल फल के रूप में
ही किया जाता है, खुबानी की तरह मेवा की तरह नहीं। आड़ू में भी एक गुठली होती है। यह
फल मैदानी भागों में गर्मियों के मौसम में अधिकांशतः पाया जाता है।
आड़ू के वृक्ष का प्रजनन कलिकायन द्वारा होता
है। आड़ू वृक्ष के मूल तने पर अप्रैल, मई महीने में रिंग बड़िंग की जाती है। पौधे 15
से 18 फुट की दूरी पर दिसंबर, जनवरी महीने में लगाये जाते हैं। सुंदर आकार व अच्छी
वृद्धि के लिये प्रति दो वर्ष में कटाई, छँटाई करनी चाहिये। अप्रैल, मई के महीने
में गुलाबी सुंदर रंग के फूल आते हैं और जून के महीने में फल लगता है। प्रति वृक्ष
30 से 50 किलो लगता है। इसकी तासीर गर्म होती है। आड़ू में प्रोटीन, वसा, फाइबर,
कैल्शियम, पोटेशियम, शुगर, आदि प्रचुर मात्रा में होती है।

No comments:
Post a Comment