हिन्दी साहित्य
Friday, March 6, 2026
मैं चाहूं तो भी मुझको चैन से रहने नहीं देगा।
मेरे भीतर अगर जिंदा कोई फनकार है कोई।।
कमलेश भट्ट 'कमल'
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