नवनिर्मित राम मंदिर-अयोध्या
डॉ. मंजूश्री गर्ग
राम मंदिर का निर्माण कार्य 5 अगस्त, 2020 में भूमि पूजन के साथ प्रारम्भ हुआ
था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 40 किलो चाँदी की ईंट से आधार शिला रखी थी।
मंदिर की देख-रेख श्री रामजन्म भूमि तीर्थ ट्रस्ट के द्वारा की जा रही है। मंदिर
के गर्भगृह और प्रथम तल के निर्माण के पश्चात् 22 जनवरी, 2024, सोमवार, विक्रमी
संवत् 2080, पौष मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को अभिजीत मुहुर्त में श्री
राम के बाल रूप की प्राण प्रतिष्ठा की गयी। राम जी की बाल रूप की मूर्ति के आगे श्री राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न जी की
प्राचीन मूर्तियाँ भी विराजमान हैं जो राम मंदिर निर्माण के प्रारम्भ होने पर कुछ
समय के लिये अयोध्या में ही अन्यत्र विराजित की गयी थीं। जहाँ उनकी विधिवत् पूजा-अर्चना
की गयी व भक्त गण भगवान के दर्शन भी कर पा रहे थे। अभिजीत मुहुर्त 12 बजकर 30 सेकेंड
के बीच रहा। मूर्ति का निर्माण कर्नाटक के मूर्तिकार अरूण योगीराज ने किया था।
श्री राम लला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के लिये यजमान के रूप में तत्कालीन
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को चुना गया। इसके लिये उन्होंने 11 दिन तक विशेष
व्रत का पालन किया, जिसमें उन्होंने केवल नारीयल पानी पिया और फर्श पर शयन किया।
इस कार्यक्रम के भव्य आयोजन में देश-विदेश के 7000 से अधिक आमंत्रित
अतिथि(अभिनेता, राजनेता, नौकरशाह, व्यापारी, आध्यात्मिक नेता, गायक-गायिका, एथलीट,
आदि) सम्मिलित हुये। 22 जनवरी, 2024 को पूरे भारत वर्ष में उत्सव का वातावरण था।
श्री मोदी जी के कहने पर अधिकांश भारतीयों ने अपने घरों में दीपक जलाये और सभी में
दीवाली का सा उत्साह देखने को मिला।
राम मंदिर के द्वितीय तल के पूर्ण होने पर 5 जून, 2025 को राजा राम के रूप में(
माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान जी के साथ) राम दरबार की स्थापना
हुई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री आदित्य नाथ योगी जी ने विशेष पूजा अर्चना
की। साथ ही सूर्यदेव भगवान, भगवान शिव, भगवान गणेश, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा
जी को समर्पित मंदिरों की स्थापना हुई। मंदिर परिसर में तुलसीदास जी की मूर्ति,
जटाय़ु और गिलहरी की मूर्तियाँ बनी हुई हैं।
मंदिर के ऊपर शिखर व कलश बनने के बाद 25 नवंबर, 2025 को राम मंदिर का ध्वज श्री नरेन्द्र मोदी
द्वारा मंदिर के 161 फुट ऊँचे शिखर पर 42 फुट ऊँचे ध्वज दंड पर लगाया गया। ध्वज का
रंग केसरिया है, जो मजबूत पैराशूट कपड़े से बना है। जिस पर सूर्य, ऊँ और कोविदार(कचनार)
वृक्ष के चिह्न बने हैं, जो सनातन धर्म, शौर्य और सूर्यवंश की परंपरा के प्रतीक
हैं। ध्वज की लंबाई 22 फुट और चौड़ाई 11 फुट है।
राम मंदिर नागर शैली में बना है। राम मंदिर की मुख्य संरचना का नक्शा अहमदाबाद
के सोमपुरा परिवार द्वारा बनाया गया है जिनके द्वारा सोमनाथ मंदिर व अन्य अनेक
मंदिरों की संरचना बनायी गयी है। मुख्य संरचना में मंदिर तीन मंजिला ऊँचे चबूतरे
पर बना है। गर्भगृह मध्य में अष्टकोणीय बना है। इसमें पाँच मंडप हैं। एक तरफ तीन
मंडप कुहू, नृत्य और रंग के हैं। दूसरी तरफ दो मंडप कीर्तन और प्रार्थना के लिये
हैं। मंदिर की लंबाई 380 फुट, चौड़ाई 250 फुट व ऊँचाई 161 फुट है। जिसमें 392
स्तंभ, 44 द्वार हैं, जिन पर देवी-देवताओं की मूर्तियाँ उत्कीर्ण हैं। मंदिर के
मुख्य दरवाजों, भगवान राम के सिंहासन, कलश व अन्य हिस्सों को स्वर्ण मंडित करने के
लिये लगभग 45 किलो 24 कैरेट सोने का प्रयोग किया गया है।
डॉ. राजन बाबू(प्रधान वैज्ञानिक) नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ रॉक मैकेनिक्स, के. जी.
एफ कोलार ने राम मंदिर निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और पूरी जाँच के
बाद ही पत्थरों का प्रयोग किया गया है। राम मंदिर की नींव के लिये मुख्य रूप से
कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर, सदर-हल्ली, देवन हल्ली, आंध्र के वारंगल और तेलंगाना के
करीम नगर के पत्थरों का प्रयोग किया गया है। मंदिर के लिये राजस्थान से बलुआ
पत्थर(Pinksand stone) और कर्नाटक के
मैसूर क्षेत्र से श्याम शिला(Black
schist) का उपयोग किया गया है। भगवान राम की बाल रूप की मूर्ति के लिये नेपाल की शालिग्राम
शिला का उपयोग किया गया है। मंदिर के निर्माण के लिये गुणवत्तापूर्ण पत्थर के
अतिरिक्त अन्य किसी साम्रगी का उपयोग नहीं किया गया है। मंदिर का निर्माण पत्थर से
पत्थर इंटरलॉकिंग प्रणाली का उपयोग करके किया गया है।
वरिष्ठ वैज्ञानिक राजन बाबू के अनुसार मंदिर का निर्माण इस तरह से किया गया है
कि बिजली, बारिश, भूकंप से मंदिर को कोई नुकसान नहीं होगा, उनके अनुसार इस मंदिर
की आयु 1000 वर्ष से अधिक होगी।


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