ज्ञान की धारा भी, नदी की धारा के समान ऊपर से नीचे की ओर बहती है इसीलिये गुरू का
आसन हमेशा शिष्य के आसन से ऊँचाई पर होता है।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
No comments:
Post a Comment