Tuesday, February 10, 2026


ज्ञान की धारा भी, नदी की धारा के समान ऊपर से नीचे की ओर बहती है इसीलिये गुरू का 

आसन हमेशा शिष्य के आसन से ऊँचाई पर होता है।

                                                                    डॉ. मंजूश्री गर्ग 

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