मैं आऊँगा! आऊँगा! आऊँगा!
कभी मैं हवा बन के आऊँगा,
बिखरेंगी जुल्फें तेरी, सवारूँगा।
कभी मैं चाँद बन के आऊँगा,
छूकर गात तेरे, चाँदनी बिखराऊँगा।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
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