बार-बार आती है मुझको
मधुर याद बचपन तेरी,
आ जा बचपन, एक बार फिर
दे दो अपनी निर्मल शान्ति
व्याकुल व्यथा मिटाने वाली
वह अपनी प्राकृत विश्रांति।
सुभद्रा कुमारी चौहान
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