Saturday, May 21, 2022


सब कुछ कह दूँगी

 

सब कुछ कह दूँगी,

राज सारे खोल दूँगी।

लगता नहीं; क्योंकि?

सामने जब तुम होते हो,

कुछ भी कहने की हालत में,

तब हम नहीं होते।


            डॉ. मंजूश्री गर्ग


  

Tuesday, May 17, 2022


कान्हा का प्यार ------

राधा और ललिता दोनों

सखी थीं कान्हा की.

करती थीं प्यार कान्हा से।

पर, जानती थी ललिता

मैं चाहे कितना करूँ प्यार कान्हा से

कान्हा का प्यार राधा, सिर्फ राधा के लिये है। 


                              डॉ. मंजूश्री गर्ग

Saturday, May 14, 2022


हो आदि शक्ति तुम ही

 

निराकार हो या साकार तुम,

हो आदि शक्ति तुम ही।

नदियाँ इठलाती चलतीं,

फलती-फूलती प्रकृति तुम से ही।

गृह-नक्षत्र रहते घूमते,

चाँद चाँदनी बरसाता तुम से ही।

लीन प्रलय में होकर एक दिन,

नव जीवन सब पाते तुम से ही।



         डॉ. मंजूश्री गर्ग

 

 

  

Tuesday, May 10, 2022


गीत

डॉ. मंजूश्री गर्ग

 कैसे मन की बात कहें

मन पे मन का बोझ है।

 

रात अँधेरी चमके तारे

सजन हमारे कहाँ छुपे हो?

हम तो सजनि! साथ तुम्हारे

पूनम मावस हाथ तुम्हारे।

 

चाँद-चाँदनी साथ चले

धरती औ आकाश तले।

फूलों में फूलों की खुशबू

ऐसे मन में आन बसे हो।

 

 

 

Monday, May 9, 2022



चार दिन की चाँदनी से जिंदगी कटती नहीं।

जिंदगी को चाहिये उम्र-भर की रोशनी।।


              डॉ. मंजूश्री गर्ग

  

Friday, May 6, 2022

 


मन के पाँवों में बँधे हैं, उनकी यादों के घुँघरू।

सँभाल के पाँव रखे चाहे जितना, झनकते ही हैं ये घुँघरू।।


                     डॉ. मंजूश्री गर्ग


Tuesday, May 3, 2022


उठती-गिरती लहरें, कहती हैं कथा प्यार की।

सागर की बाँहों में, चाँदनी सिमट आयी है।।


                   डॉ. मंजूश्री गर्ग