फिर किसी ने की है शरारात, हवाओं में घोल दी है शराब।
भौंरों की बात और है, फूल भी बहक रहे हैं आज।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
हों खुशी के पल या गम के
छलकती ही है मन की गागर।
बसन्ती मौसम
पीली-पीली सरसों
मन-भावन।
विश्व जल दिवस
जल जीवन
जल से ही कल हैं
हम सब ही।
नजर मिला के मिरे पास आ के लूट लिया।
नजर हटी थी कि फिर मुस्कुरा के लूट लिया।।
जिगर मुरादाबादी
मुँह से कुछ बोला नहीं और रहा वो मौन
नयनों से सब कह गया जाने वो था कौन।
जगदीश तिवारी