Saturday, December 13, 2025

 

'अग्नि पुराण' में 'भगवान' का प्रयोग विष्णु के लिये किया गया है क्योंकि उसमें 'भ' से भर्त्ता के गुण विद्यमान हैं और 'ग' से गमन अर्थात् प्रगति या सृजन कर्त्ता का बोध होता हैं। विष्णु को सृष्टि का पालन कर्त्ता और श्रीवृद्धि का देवता माना गया है। 'भग' का पूरा अर्थ ऐश्वर्य, श्री, वीर्य, शक्ति, ज्ञान, वैराग्य और यश होता है जो कि विष्णु में निहित है। 'वान' का प्रयोग प्रत्यय के रूप में हुआ है, जिसका अर्थ धारण करनें वाला अथवा चलाने वाला होता है अर्थात् जो सृजनकर्त्ता, पालन कर्त्ता हो, श्रीवृद्धि करने वाला हो, यश और ऐश्वर्य देने वाला हो, वह भगवान है। विष्णु में ये सभी गुण विद्यमान हैं।

                                                            -अग्नि पुराण से

No comments:

Post a Comment