Wednesday, January 18, 2017

वैनिला(VANILLA)



डॉ0 मंजूश्री गर्ग

वैनिला की फसल सर्वप्रथम मैक्सिको के गुल्फकोस्ट घाटी में पाई गयी. आजकल मेडागास्कर में सबसे अधिक उत्पादन होता है. विश्व का लगभग अस्सी प्रतिशत वैनिला का उत्पादन मेडागास्कर में ही होता है.

वैनिला बेल जैसे उगता है और किसी पेड़ या खम्भे के सहारे चढ़ता है. वैनिला के फूल हल्के पीले रंग के होते हैं. एक फूल से एक ही फल बनता है. फूल में नर(Anther) और मादा(Stigma) दोनों अंग होते हैं जो एक हल्की सी झिल्ली से जुड़े रहते हैं. पहले एक विशेष मधुमक्खी के द्वारा Pollination की क्रिया होती थी जो मैक्सिको में ही पाई जाती हैं किन्तु अभी कृत्रिम तरीके से हाथ द्वारा Pollination करके फसल उगायी जाती है. वैनिला की फली गहरे भूरे रंग की होती है. जब यह फली पक जाती है, तो फटने से पहले ही इन्हें तोड़ लिया जाता है. इन फली(beans) के अन्दर गहरा लाल रंग का तरल पदार्थ होता है, यही(vanilla essence) होता है, जो कि बहुत मँहगा होता है. मसालों में ‘केसर’ के बाद vanilla essence का नंबर आता है. किंतु आजकल synthetic vanilla essence भी बाजार में उपलब्ध है.

Friday, January 13, 2017

हारसिंगार




डॉ0 मंजूश्री गर्ग

हारसिंगार को शैफाली और पारिजात नाम से भी जाना जाता है. समुद्र-मंथन के समय चौदह रत्नों में से एक पारिजात वृक्ष था, जिसे देवताओं को दिया गया. देवताओं के राजा इन्द्र ने पारिजात वृक्ष को स्वर्ग के नंदनवन में लगा दिया. द्वापर युग में रानी सत्यभामा के कहने पर श्री कृष्ण हारसिंगार-वृक्ष को पृथ्वी पर लाये.

हारसिंगार का वृक्ष शंकुकार होता है और लम्बाई दस से बारह फुट तक होती है, फैलाव आम के वृक्ष के जैसे होता है. इसकी पत्तियाँ भी शंकुकार और खुरदुरी होती हैं. पत्तियों की लम्बाई तीन से चार इंच और चौड़ाई दो से तीन इंच तक होती है. अगस्त-सितम्बर के महीने में हारसिंगार में कलियाँ आनी शुरू हो जाती हैं. ये कलियाँ शाम के समय खिलनी शुरू होती हैं और आसपास का सारा वातावरण सुगंध से सरोबार हो जाता है. हारसिंगार का फूल सुगंध के साथ-साथ देखने में भी बहुत सुंदर लगता है-सफेद पंखुरियाँ और नारंगी डंडी. सुबह होते-होते फूल झरने लगते हैं. पेड़ के नीचे देखो तो फूलों का कालीन बिछा मिलता है. हारसिंगार के फूल चाहिये तो पेड़ के नीचे आँचल फैलाकर खड़े हो जाओ. आपका आँचल महकते रंग-बिरंगे फूलों से भर जायेगा. हारसिंगार के फूलों की डंडी से प्राकृतिक नारंगी रंग बनता है. हारसिंगार के फल चपटे होते हैं, जिनके अन्दर बीज होता है.
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Thursday, January 12, 2017

मुस्कान के लिये

ये 'व्हाट्एप' की दुनिया
ये 'फेसबुक' की दुनिया
लंबी कतारें दोस्तें की
पर, मन का जो हाल जान ले
वो दोस्त दिखता कहीं नहीं ।
बिन कहे जो पढ़ ले हाल दिल का
दोस्त एक ही काफी है मुस्कान के लिए।

  डॉ0 मंजूश्री गर्ग

Wednesday, January 11, 2017

उठे थे दुआओं के लिये हाथ जिनके लिए ।
काँप उठे हैं देख खंजर हाथ में उनके ही ।।

      डॉ0 मंजूश्री गर्ग

Sunday, January 8, 2017


गजल
डॉ0 मंजूश्री गर्ग

पल-पल बदलते मौसम का हाल क्या कहिये।
रंग बदलती  दुनिया का हाल क्या कहिये।।

फटी  जीन्स  फैशन  है  आजकल का ।
अमीरी-गरीबी  का  हाल क्या कहिये ।।

कंक्रीटी-जंगलों   में  रहे  हैं  बदल।
शहरों का अब और हाल क्या कहिये ।।

बिन  बोले  ही बहुत बोले हैं नयन।
दिल का अब और हाल क्या कहिये ।।

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Wednesday, January 4, 2017

गिलहरी

डॉ0 मंजूश्री गर्ग

छोटी सी, प्यारी सी, श्रम की
प्रतीक है गिलहरी  ।

तीन रेखायें पृष्ठ भाग पर
श्री राम के आशीर्वाद की
प्रतीक है गिलहरी  ।

कभी यहाँ, कभी वहाँ
फुदकती चंचलता की
प्रतीक है गिलहरी ।

दो पैरों पर बैठ,
दो से चुगती दाना
मनोहारी है गिलहरी ।
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Monday, January 2, 2017

सूरज दादा!
डॉ0 मंजूश्री गर्ग

धुंध की चादर ओढ़े
क्यूँ बैठे  हो
सूरज दादा!
कर फैला कर
दूर करो अँधेरा।

खेलें, कूदें
धूम मचायें
संग तुम्हारे गायें
जब आँगन में
धूप नहाये।
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