Friday, January 4, 2019



आदमी छोटे-बड़े होते नहीं
दरअसल छोटी-बड़ी हैं कुर्सियाँ।

                     -राजगोपाल सिंह





मीठे फलों की डाली खुद को बचाये रखना
शहरों से चल पड़े हैं गाँवों की ओर पत्थर।

                               -डॉ0 कुँअर बेचैन



Thursday, January 3, 2019




दो पल की खुशी के बदले,
मिला उम्र-भर का दर्द।
पर, वो दो पल भी,
कहाँ नसीब सबको होते।

                    डॉ0 मंजूश्री गर्ग



Wednesday, January 2, 2019



मांगने से पहले कुछ भी, सोच लो फिर माँगना
एक चौखट के लिये क्या पेड़ को कटवाओगे।

                              -राजगोपाल सिंह




चहकते पुर, ग्राम-परिसर, महकते वन छोड़कर
ध्वंस के उन्नत शिखर पर बस रहा है आदमी।

                          -डॉ0 गिरिजानन्दन त्रिगुणायत आकुल


Tuesday, January 1, 2019




बरस रही है चाँदनी
चमक रहे रेतीले तट।
नदी और सागर हों
चाहें कितनी दूरी पे
एक गगन की छाया में
धड़कनें एक हैं दोनों की।

                 डॉ0 मंजूश्री गर्ग


मैं कब से ढ़ूँढ़ रहा हूँ।
अपने प्रकाश की रेखा।।

तम के तट पर अंकित है।
निःसीम नियति का लेखा।।

देने वाले को अब तक।
मैं देख नहीं पाया हूँ।।

पर पल भर सुख भी देखा।
फिर पल भर दुःख भी देखा।।

किस का आलोक गगन से।
रवि शशि उडुगन बिखराते।।

               भगवती चरण वर्मा