हिन्दी साहित्य
Thursday, January 9, 2020
युग बदलें
सिलसिले प्यार के
चलते रहें।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
Wednesday, January 8, 2020
शिशिर ऋतु
कंपकंपाती सर्दी
मन डरा सा।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
Tuesday, January 7, 2020
क्रोध को शान्त करने के लिये, चाँद की सी तासीर चाहिये
जो सूरज की किरणों को भी, शीतल चाँदनी में बदल देता है।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
Monday, January 6, 2020
चाँदनी रात!
या तुम साथ मेरे
उजाले लिये।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
Sunday, January 5, 2020
मित्र वो सच्चा
आईना बनकर
साथ निभाता।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
Friday, January 3, 2020
सुनहरी यादें बीते कल की
सुनहले सपने फिर कल के।
तैरते आँखों में पल-प्रतिपल।
मानों सुबह-शाम के बीच
बैठें हों
हम भरी धूप में।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
Wednesday, January 1, 2020
सुबह का करें स्वागत
सूरज की किरणों से।
करें श्रृंगार कुसुमों से
औ
’
वंदन कलरव से।
डॉ, मंजूश्री गर्ग
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)