Monday, April 13, 2020





कागजी फूल से, बनावटी रिश्ते।
खुशबू नहीं जिनमें, है नकली रंग।।

                      डॉ. मंजूश्री गर्ग

Sunday, April 12, 2020



तेरे रूप से
साकार है संसार
गंध जीव में।

                             डॉ. मंजूश्री गर्ग

Thursday, April 9, 2020



कर्फ्यू सा लगा।
सुनसान सड़कें
अप्रैल माह।

                         डॉ. मंजूश्री गर्ग

Tuesday, April 7, 2020



कैसी!
लड़ाई है।
अपनों ने,
अपनों से,
अपनों के लिये
दूरी बनाई है।
                      डॉ. मंजूश्री गर्ग











Sunday, April 5, 2020



सब मिल साथ चलेंगे, बीहड़ वन में राह बनेगी।
आशाओं के दीप जलेंगे, अँधकार सब होंगे दूर।।

                      डॉ. मंजूश्री गर्ग


Friday, April 3, 2020



खुशियाँ आयें जीवन में क्या कम है?
मनाने का मौसम तो अभी नहीं है।
                      डॉ. मंजूश्री गर्ग




Wednesday, April 1, 2020



सतयुग सा
प्रकृति की गोद में
सादा जीवन।

                                डॉ. मंजूश्री गर्ग