हिन्दी साहित्य
Friday, May 8, 2020
झरते दिन
मुरझाये पत्ते से
बिना उमंग।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
Thursday, May 7, 2020
'अक्षय' है वो
जो क्षर नहीं होता
ब्रह्म स्वरूप।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
Wednesday, May 6, 2020
आम के बाग
सौंधी सी महक औ'
मीठी सी धूप।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
Tuesday, May 5, 2020
हरी घास पे
शबनम के मोती
लगें सुहाने।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
Monday, May 4, 2020
पानी कितना भी गहरा हो, डूबना नहीं, उबरना ही है।
रात कितनी भी काली हो, सबेरा तो होना ही है।।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
Sunday, May 3, 2020
नदी मिले तो
सागर हरषाये
महा मिलन।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
Saturday, May 2, 2020
पार उतारा।
केवट ने राम को।
या स्वयं तरा।।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
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