Sunday, July 4, 2021


जादुई खेल

चमत्कार हाथों का

धोखा आँखों को।


                             डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, July 3, 2021


उत्सव वाले दिन कहाँ?

 

दो-चार फूलों के खिलने से

उपवन नहीं सजा करते।

 

दो-चार दीपक के जलने से

दीपावली नहीं सजतीं।

 

दो-चार बूँदों के गिरने से

बरसात नहीं होती।

 

दो-चार जन के सजने से

उत्सव नहीं मना करते।

                    डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, July 1, 2021

 

कोमल तंतु

मुड़ जायेंगे, पर

टूटेंगे नहीं।


                           डॉ. मंजूश्री गर्ग

Sunday, June 27, 2021

 

बूँद ‘मैं’, समुद्र ‘तुम’

कण ‘मैं’, पर्वत ‘तुम’

पाँखुरी ‘मैं’, फूल ‘तुम’

‘अंश’ तुम्हारा ही हूँ प्रभु ‘मैं’।

 

                      डॉ. मंजूश्री गर्ग

 



सोना, मानुष

जितना तपता है

खरा होता है।


                            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, June 24, 2021

 

मय पी के जो गिरता है तो लेते हैं उसे थाम

नजरों से गिरा जो उसे फिर किसने सँभाला।।


      नजीर अकबराबादी

Sunday, June 20, 2021


सूना पटल

चितेरा है बादल

रचे भवन।


                         डॉ. मंजूश्री गर्ग