Monday, January 10, 2022


हजार दीप

जगमगाये मन

बँधी है आस।


                 डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, January 8, 2022


बिन कहे बहुत कहा तुमसे।

 

दिल का हाल छुपाया हमने

मौन रहे कुछ भी ना कहा.

महफिल में भी रहे, तो

मुस्कान, गहने सी रहे पहने.

फिर भी, नयनों की उदासी ने

बिन कहे बहुत कहा तुमसे।


               डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, January 7, 2022



जब हम हुते तवै तुम्ह नांही, अब तुम्ह हौं मैं नांही।

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कहै रैदास भगति एक उपजी, सहजै होइ स होइ।

                                           रैदास

  

Thursday, January 6, 2022


उखड़ेंगे ना

दूब से जुड़े हुये

हम धरा से।


                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, January 3, 2022

 


जीतने के लिये ही नहीं, हारने के लिये भी साथी चाहिये और ऐसा साथी जिससे हारने पर भी आनन्द की अनुभूति हो।

              डॉ.मंजूश्री गर्ग

 


सुबह हुई तो,

 

सुबह हुई तो,

रात के

मधुर सपने

चुरा ले गयी।

कुछ लालिमा

आकाश तले,

कुछ मधुरता

फूलों पे

बिखरा गयी।


        डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, January 1, 2022


समय की दहलीज पर जला दो आज चिराग।

रोशन होंगी आने वाली राह अँधेरी।।


            डॉ. मंजूश्री गर्ग