Monday, August 8, 2022


साईं सब संसार में मतलब का व्यवहार।

जब लगी पैसा गाँठ में तब लगी ताको यार।

                               गिरधर 

Sunday, August 7, 2022


एक बूँदः

 

सागर से चुराकर अपना अस्तित्व

वाष्प बन रख लिया बादल रूप।

 

सूरज से चुराकर उसकी किरणें

इन्द्रधनुषी रंग में रंगा तन-मन।

 

तपती धरती को देख मन तड़पा

अश्रु लड़ी में पिर आयी धरती पर।

 

किन्तु सीपी में गिरी, बनी एक मोती

एक बूँद नन्हीं सी, प्यारी सी।


         डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, August 6, 2022

 

नारी तो एक फूल..........

 

नारी तो एक फूल है

सौरभ बिखेरना है उसे।

 

            चाहे जिस रंग में खिले।

            चाहे जिस ढ़ंग में ढ़ले।

            चाहे उगे कमल सी

            चाहे पले गुलाब सी।

 

चाहे ले सौम्यता

बेला औ चमेली सी

चाहे ले उच्श्रृंखलता

गुलमोहर औअमलतास सी।

 

            चाहे निर्बल गुलमेंहदी सी

            चाहे सबल गैंदे सी

            चाहे झरे हरसिंगार सी

            चाहे सजे मालती सी।

 

मुस्कान बिखेरना है उसे

नारी तो एक फूल है।

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Friday, August 5, 2022

 

प्राकृतिक चिकित्सा

डॉ. मंजूश्री गर्ग

 

हमारा शरीर पंच भौतिक तत्वों से बना है- जल, वायु, अग्नि, आकाश, पृथ्वी. इन  पाँचों तत्वों के संतुलन से ही व्यक्ति का शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य स्वस्थ रहता है. प्रत्येक व्यक्ति की प्रकृति अलग होती है और अलग-अलग समय पर इन तत्वों का प्रभाव भी अलग-अलग होता है. व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिये अपनी प्रकृति को समझना चाहिये, उसी के अनुसार अपने खाने-पीने का ध्यान रखना चाहिये. जैसे-

जल-  प्रायः हमारे शरीर में 70% पानी की मात्रा होती है किन्तु प्रत्येक व्यक्ति में कम-ज्यादा भी होती है. कभी हमें पानी की अधिक आवश्यकता होती है और कभी कम. अपनी प्रकृति को समझकर ही पानी का उपयोग करना चाहिये.

वायु- वायु का सेवन हम प्रत्येक पल श्वास के माध्यम से करते ही रहते हैं. हर समय संभव ना भी हो, तो दिन में कुछ मिनट या घंटे हमें शुद्ध ताजा हवा में टहलना या बैठना अवश्य चाहिये.

अग्नि- प्रत्येक व्यक्ति में अग्नि होती है, इसके बिना व्यक्ति जी नहीं सकता. इसीलिये मृत व्यक्ति का शरीर ठंडा होता है. आवश्यकतानुसार अग्नि(तेज) का सेवन करना चाहिये. चाहें वो शुद्ध सूर्य की किरणों से प्राप्त हो या भोज्य पदार्थों के माध्यम से.

आकाश- आकाश को शून्य भी कहते हैं. हमें दिन में कुछ मिनट ध्यान अवश्य करना चाहिये जिससे हमारा मन-मस्तिष्क शून्य हो जाता है अर्थात् पुरानी बातों से हट जाता है. शून्य पटल पर ही स्वस्थ विचारों का आगमन होता है.

पृथ्वी- पृथ्वी का सबसे बड़ा गुण गुरूत्वाकर्ष है. जिस व्यक्ति के पैर धरती पर टिके रहते हैं, वही अगला कदम सोच-समझकर उठाता है और धरती के महत्व को समझता है.

अपने इन्हीं पाँचों तत्वों को समझना और उनके अनुसार आचार-विचार करना प्राकृतिक चिकित्सा का मूल मंत्र है.

 

 

Thursday, August 4, 2022


राजै रसमै री तैसी बरखा समै री चढ़ी,

चंचला नचै री चकचौंध कौंध वारै री।

व्रती व्रत हारै हिए परत फुहारैं,

कछु छीरैं कछु धारैं जलधार जलधारैं री।

भनत कविंद कुंजभौन पौन सौरभ सों.

काके न कँपाय प्रान परहथ पारै री ?

काम कंदुका से फूल डोलि डोलि डारै, मन

और किए डारै ये कदंबन की डारै री।

 

                              कवींद्र 


तुम्हीं कान्हा हो, कन्हैया हो तुम।

तुम्हीं नन्दलाला, वासुदेव हो तुम।

तुम्हीं माखनचोर, चितचोर हो तुम।

तुम्हीं बाँसुरी वादक, सुदर्शन चक्रधारी हो तुम।

गोपों संग ग्वाला, गोपियों की प्रीत हो तुम।

राधा के मनमीत, द्वारकाधीश रूक्मिणी के।


डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, August 3, 2022

हाइकु

डॉ. मंजूश्री गर्ग


पास हो प्रिया

प्रियतम का प्यार

बढ़ता सदा.

1.


दूर हो प्रिय

प्रियतमा का प्यार

बढ़ता और.

2.