दो पल बस
सौ बरस नहीं जी
जिये हैं हम।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
नन्हीं सी आस
समेटे है भीतर
बड़ा सपना।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
पंक में रह
कमल सा खिलना
जग का सार।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
प्रेम के पल
लालिमा कपोलों की
बनी प्रहरी।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
जुड़ी है आशा
चाह फिर मन में
लेती हिलोरें।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
तुम रूठे तो
सरगम की धुन
रूठी हमसे।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
वंशावली में
माता-पिता शामिल
सदा रहेंगे।
डॉ. मंजूश्री गर्ग