Saturday, October 14, 2023


 

दिन दिन घटते दिन, लंबी होती रातें।

धीरे से दस्तक दी सर्दी ने आने की।।

                                            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, October 13, 2023


मुड़ जायेंगे

लचक है लता सी

चाहोगे जैसे।


              डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, October 12, 2023


छुईमुई सी

नजरों से छुओ तो

कुम्हलाती हो।


            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, October 11, 2023


ताप सह के

देते हैं हमें छाँव

वट, पीपल।


                  डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, October 10, 2023


खुशी के पल

धूप खिली आँगन

छँटा कोहरा।


                   डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, October 9, 2023


लिबासों की तरह बदलते हैं जो मित्र,

कैसे निभायेंगे वो रिश्ते पुराने।

                     डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, October 8, 2023


टूटे जो रिश्ते

मन मिले बिना तो 

जुड़ ना सकें।


            डॉ. मंजूश्री गर्ग