Sunday, April 7, 2024


तेरी जुल्फों के साये में शामें सुहानी हैं,

हैं रोशन रातें तेरी ही मुस्कानों से।

बज उठते हैं जब तेरी यादों के घुँघरू

जिंदगी कई सरगमें सुनाती है हमें।।


            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, April 6, 2024

 

        

डायनासोर

 

डायनासोर से

कंक्रीट के जंगल

धीरे-धीरे खाने लगे

नदी से रेत

पर्वत से पत्थर

वन से लकड़ी

खानों से लोहा।

 

धीरे-धीरे धरती पे

बढ़ने लगा प्रकृति का कोप

आने लगीं बाढ़ें

होने लगे झंझावात

भूकंप, सुनामी

रोज की सी बातें।


            डॉ. मंजूश्री गर्ग

Friday, April 5, 2024


         

ये दर्द,

ये चुभन,

ये बेचैनी।

सब दोस्त

हैं अपने।

भूलकर भी,

भूलना चाहें

तुम्हें तो;

भूल नहीं

पायेंगे हम।


            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, April 4, 2024


एक पल

डॉ. मंजूश्री गर्ग 

एक पल की उड़ान क्या होती है?

पिंजरे में कैद पक्षी से पूछो!

 

जल की शीतलता क्या होती है?

जल विहिन मछली से पूछो!

 

मिलन का एक पल क्या होता है?

विरह में डूबे प्रेमी से पूछो!

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Wednesday, April 3, 2024


भीष्म प्रतिज्ञा

 डॉ. मंजूश्री गर्ग

अंधा प्रेम ही नहीं होता,

अंधा मोह ही नहीं होता,

अंध भक्ति भी होती है.

जैसे- गंगापुत्र देवव्रत ने

अंध पितृ भक्ति के कारण,

आजीवन विवाह न करने की

भीष्म प्रतिज्ञा ले ली, औ

हस्तिनापुर का भविष्य ही

दाँव पर लगा दिया. 

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Tuesday, April 2, 2024

      सुबह हुई तो,

रात के

मधुर सपने

चुरा ले गयी।

कुछ लालिमा

आकाश तले,

कुछ मधुरता

फूलों पे

बिखरा गयी।


        डॉ. मंजूश्री गर्ग

             

Monday, April 1, 2024


संदेश

 

कोयल की कुहुक सी

आमों की सुगंध सी

महकती हवायें।

चारों दिशाओं से

दे रहीं हैं संदेश

प्रिय के आने का।


            डॉ. मंजूश्री गर्ग