Friday, June 7, 2024


दो जन मिले बिना, सम्भव नहीं,

बात प्यार की हो, या तकरार की।।


डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, June 6, 2024


कोई हार कर भी खुश है,

कोई जीत कर भी नहीं।

अपनी-अपनी परिधियाँ,

हार जीत की सबकी।


        डॉ. मंजूश्री गर्ग 


मत अधीर हो धरा, आ पहुँचे पाहुने बादल।

रससिक्त तुम्हें कर, पहनायेंगे चूनर धानी।।


डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, June 4, 2024



        रिमझिम-रिमझिम सावन जैसा,

    पल-पल बरसता प्यार तुम्हारा।

    अन्तरतम तक जो भिगो दे,

    ऐसा मधुरिम प्यार तुम्हारा।।

       

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

Monday, June 3, 2024


ठुकराइये या अपनाइये,

रूठिये या मनाइये।

हम तो जियेंगें तेरे नाम से,

मरेंगें तो तेरे नाम से।।


    डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, June 2, 2024


 जमीं पर नहीं पड़ते हैं कदम हमारे,

अरमानों को पंख लगे हैं आज।

आकाश को छू लेंगे एक दिन हम,

चाहतों में नया रंग भरा है आज।।


        डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, June 1, 2024


 

तन के गहने

हैं अनगिन।

मन का सिंगार

तुम हो प्रियतम।।


    डॉ. मंजूश्री गर्ग