Friday, June 14, 2024


आँधियों में उजड़े चमन, बसाती प्यार की बयारें।

आँधियाँ हों नफरत की, तो बसायेगा फिर कौन?


        डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, June 13, 2024


पंख जल गये हैं सभी कड़ी धूप में।

फिर भी मन की उड़ानें लगती हैं सुन्दर।।


        डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, June 12, 2024


जिंदगी में छाँव बनकर आप आये हैं।

अब हमें धूप सुहानी लग रही है।।


        डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, June 11, 2024


 ठोकर नहीं कहती कि रोक दो बढ़ते कदम।

कहती है बढ़ते रहो आगे सँभल-सँभल कर।।


डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, June 10, 2024


बिन थामे ही हाथ, हमेशा

थामे रहते हाथ हमारा।

कैसे कह दें! साथ नहीं हो,

पल-पल साथ निभाते हो।।


डॉ. मंजूश्री गर्ग 


मंजिल पानी है गर

अवरोधों से डरना कैसा!

कौन है? जिसने ताप सहा नहीं

सूरज जैसा चमका जो भी।।


        डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, June 8, 2024

 

    

    तुम साथ थे मेरे

    तुम साथ हो मेरे

    तुम साथ रहोगे हमेशा।

    मेरी बातों में तुम

    मेरे ख्बाबों में तुम

    मेरी यादों में तुम

    मेरे गीतों में तुम

    मेरी गजलों में तुम

    तुम ही तुम हो

    जीवन के हर पल में तुम।

 

            डॉ. मंजूश्री गर्ग