Saturday, February 8, 2025

 

आ जाओ सनम!

 

आ जाओ सनम!

महावर कर रही इंतजार,

पायल की छम-छम रूठी है।

 

आ जाओ सनम!

मेंहदी कर रही इंतजार,

कंगन की खन-खन रूठी है।

 

आ जाओ सनम!

बिंदिया कर रही इंतजार,

अधरों की मुस्कान रूठी है।


            डॉ. मंजूश्री गर्ग



Friday, February 7, 2025

 

हो आदि शक्ति तुम ही

 

निराकार हो या साकार तुम,

हो आदि शक्ति तुम ही।

नदियाँ इठलाती चलतीं,

फलती-फूलती प्रकृति तुम से ही।

गृह-नक्षत्र रहते घूमते,

चाँद चाँदनी बरसाता तुम से ही।

लीन प्रलय में होकर एक दिन,

नव जीवन सब पाते तुम से ही।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग



Thursday, February 6, 2025

 

तेरी ही गंध से

धूप, दीप, चंदन,

अक्षत रखे हैं थाल में।

अर्ध्य देने को आतुर

हैं नयन हमारे।

प्रिय! बीत गया विरह का मौसम

बासंती मौसम आ गया।

बासंती गंध से महक रहे

राजपथ के गलियारे।

दिल के गलियारे महकें

तेरी ही गंध से।


            डॉ. मंजूश्री गर्ग


Wednesday, February 5, 2025


विराजते कान्हा

डॉ. मंजूश्री गर्ग

काश! हम मोर होते।

मोर पंख बन, मुकुट में विराजते कान्हा।

 

काश! हम बाँस होते कान्हा।

बाँसुरी बन, अधरों पे विराजते कान्हा।

 

काश! हम कदंब होते।

हमारी ही छाया में, मुरली बजाते कान्हा।

 

फिर कभी तुम हमसे

पास-पास रहके, ना दूर रहते कान्हा। 

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Tuesday, February 4, 2025


कन्हैया हो तुम

तुम्हीं कान्हा हो, कन्हैया हो तुम।

तुम्हीं नन्दलाला, वासुदेव हो तुम।

तुम्हीं माखनचोर, चितचोर हो तुम।

तुम्हीं बाँसुरी वादक, सुदर्शन चक्रधारी हो तुम।

गोपों संग ग्वाला, गोपियों की प्रीत हो तुम।

राधा के मनमीत, द्वारकाधीश रूक्मिणी के।


            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, February 2, 2025

3 फरवरी, 2025 बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें

शत्-शत् नमन माँ शारदे!


शत्-शत् नमन माँ शारदे!

भावाँजलियाँ अर्पित तुम्हें माँ शारदे!

शत्-शत् नमन माँ शारदे!

काव्याँजलियाँ अर्पित तुम्हें माँ शारदे!

वरद हस्त सर पर हमारे!

हमेशा आपका बना रहे माँ शारदे!


        डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, February 1, 2025

अनमोल रत्न हैं ये

 

अनमोल रत्न हैं ये

यूँ ही ना लुटा देना।

कुछ फूल हैं जो झरे,

खुशी के पलों में।

कुछ आँसू हैं जो बहे,

गमों के पलों में।

रखना सँभाल के,

दिल की किताब में।


        डॉ. मंजूश्री गर्ग