Wednesday, March 7, 2018



ठुकराइये या अपनाइये
रूठिये या मनाइये
हम तो जियेंगें तेरे नाम से
मरेंगें तो तेरे नाम से।

                                                डॉ0 मंजूश्री गर्ग

Thursday, March 1, 2018




होली र्व म् हिन्दू नव वर्ष विक्रमी संत् 2075

की

हार्दिशुकानायें




मन द्वारे पे
खिले खुशी के फूल
सजी रंगोली।

                                           डॉ0 मंजूश्री गर्ग

Wednesday, February 28, 2018


हाइकु

डॉ0 मंजूश्री गर्ग


होली के दिन
नजरों से छू लेना
रंगेंगे हम।

उड़े बादल
हरे, पीले औ लाल
होली के दिन।

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Tuesday, February 27, 2018


हाइकु

डॉ0 मंजूश्री गर्ग

चिडियाँ जागीं
चहकी डाली सारी
हुआ सबेरा.

पलाश-वन
दहके अंगारे से
फागुन-मास.

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Monday, February 26, 2018


हाइकु

डॉ0 मंजूश्री गर्ग

कोई ना जाने
हीरे को तो केवल
जौहरी जाने.

जग को दे दें
महक औउजाला
फूल, दीप सा.

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Thursday, February 22, 2018

हाइकु



डॉ0 मंजूश्री गर्ग


मन-आँगन
सजी कल्पनायें
जैसे अल्पना.

उम्मीद जगी
उदासी के बादल
बरसे आज.

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Monday, February 19, 2018


अहसास हैं ये प्यार के----

अहसास हैं ये प्यार के
यूँ ही ना गँवा देना।
जब खिले फूल कोई आँगन में,
देख फूल को मुस्कुरा देना,
दिल को सुकून मिल जायेगा।

चाँदनी रात में बाहर आया करो
मन तुम्हारा बहल जायेगा।
देख चाँद को मुस्कुरा देना,
दिल को सुकून मिल जायेगा।

                                          डॉ0 मंजूश्री गर्ग