हिन्दी साहित्य
Wednesday, December 19, 2018
दिलों की कुंडियाँ खोलो, जेह्न की साँकले खोलो।
बड़ी भारी घुटन है, मन की सारी खिड़कियाँ खोलो।।
डॉ0 कुँअर बेचैन
Tuesday, December 18, 2018
मानती हूँ मैं
तुम दिखते कहीं नहीं,
पर, मेरे हर हाल से
वाकिफ हो तुम
जानती हूँ मैं।
डॉ0 मंजूश्री गर्ग
Monday, December 17, 2018
रिश्तों में प्यार का तड़का लगाओ,
सोंधी महक स्वयं आने लगेगी।
डॉ0 मंजूश्री गर्ग
Sunday, December 16, 2018
राम-कथा के स्वर्ण युग की कथा के प्रतीक के माध्यम से सुख के मायावी रूप का वर्णन कवयित्री ने किया है-
सुख का वह कंचन-मृग
छलता है, छलता है
मन का धनुर्धर यह
हाथ ले कुटिल कमान
तनी डोर पर
धर नुकीले बान
पीछे-पीछे उसके चलता है, चलता है।
रमा सिंह
Saturday, December 15, 2018
मृणालों-सी मुलायम बाँह ने सीखी नहीं उलझन,
सुहागन लाज में लिपटा शरद की धूप जैसा तन।
अँधेरी रात में खिलते हुये बेले सरीखा मन,
पंखुरियों पर भँवर के गीत-सा मन टूटता जाता।
मुझे तो वासना का विष हमेशा बन गया अमृत,
बशर्ते वासना भी हो तुम्हारे रूप से आबाद।
धर्मवीर भारती
हिन्दी की प्रसिद्ध लेखिका श्रीमती चित्रा मुद्गल को आपकी कृति
पोस्ट बॉक्स नंबर 203-नाला सोपारा(उपन्यास) के लिये
साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिये चयनित होने पर
हार्दिक शुभकामनायें
श्री अमिताव घोष(अंग्रेजी लेखक) को 2018 के ज्ञानपीठ पुस्कार के लिये चयनित
होने पर हार्दिक शुभ कामनायें
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