Tuesday, April 9, 2019



मैं जुगनू हूँ अपनी ही रोशनी से जगमगाता हूँ।
उधारी रोशनी नहीं ली सूरज से तारों की तरह।।

                                   डॉ. मंजूश्री गर्ग



Sunday, April 7, 2019



बैर करो तो रावण सा राम से,
मरोगे तो भी तर जाओगे।
प्यार करो तो मीरा सा कृष्ण से,
बिष भी पीओगे तो जी जाओगे।

                        डॉ. मंजूश्री गर्ग



Saturday, April 6, 2019




किससे करें शिकवा,
खुद ही रहे नासमझ।
प्रीत की।
प्रीत की रीति नहीं सीखी।
जिंदगी जी।
जिंदगी जीनी नहीं सीखी।
                        
             डॉ. मंजूश्री गर्ग




Friday, April 5, 2019



मोर होता,
पंख न होते।
मोर मोर ना होता।

सिंह होता,
दहाड़ ना होती।
सिंह सिंह ना होता।

देश होता
देश-प्रेम ना होता।
देश देश ना होता।

                          डॉ. मंजूश्री गर्ग



छकि रसाल सौरभ सने, मधुर माधवी गंध।
ठौर-ठौर झुमत झपत, झौंर-झौंर मधु अंध।।

                               बिहारी




Wednesday, April 3, 2019



जिन्दगानी दो निगाहों में सिमटती जा रही है,
प्यास बढ़ती जा रही है, उम्र घटती जा रही है।

                               वीरेन्द्र मिश्र





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