आधा चन्द्रमा है, आधी रात।
आधा जश्न बीते साल का, आधा नये साल का।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
नये साल 2023 की हार्दिक शुभकामनायें
हमने जीना सीख लिया है,
झूठ बोलना सीख लिया है।
महफिल में परिधानों सा,
मुस्कान पहनना सीख लिया है।।
सब सुख दायक नायिका-नायक जुगत अनूप,
राधा हरि आधार जस रस सिंगार सरूप।
देव
सम्बन्धों की देहरी पर खिले प्यार के फूल।
रखना कदम आगे विश्वासों के साथ।।
सहज, निर्मल, निश्छल, बह रही प्रेम-धार।
मानों नदी के तटों-बीच, बह रही जल-धार।।
तेरे मन ने जान ली, मेरे मन की बात।
क्या तुम्हें पाती लिक्खूँ, क्या करूँ मनुहार।।