6 अप्रैल, 2023 चैत्र शुक्ल पूर्णिमा, हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनायें
.01% की असफलता ही हमें कड़ी मेहनत के लिये प्रेरित करती है,
कहती है धीरे से मुस्कुराकर मंजिल पास ही है।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
आधा चंद्रमा सा प्यार है अपना।
दिन-प्रतिदिन बढ़ेगी रोशनी और।
तन के गहने
हैं अनगिन।
मन का सिंगार
तुम हो प्रियतम।।
ना सर्द हवायें हैं ना गरम,
फूल भी खिलें हैं अनगिन।
फिर भी न जाने क्यों?
उदास है मन।
डायनासोर
डायनासोर से
कंक्रीट के जंगल
धीरे-धीरे खाने लगे
नदी से रेत
पर्वत से पत्थर
वन से लकड़ी
खानों से लोहा।
धीरे-धीरे धरती पे
बढ़ने लगा प्रकृति का कोप
आने लगीं बाढ़ें
होने लगे झंझावात
भूकंप, सुनामी
रोज की सी बातें।
तुम्हारी बोली में है शहद की मिठास।
पास बैठो जरा महकेंगे बेला, गुलाब।।