सब कुछ कह दूँगी
सब कुछ कह दूँगी,
राज सारे खोल दूँगी।
लगता नहीं; क्योंकि?
सामने जब तुम होते हो,
कुछ भी कहने की हालत में,
तब हम नहीं होते।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
कान्हा का प्यार ------
राधा और ललिता दोनों
सखी थीं कान्हा की.
करती थीं प्यार कान्हा से।
पर, जानती थी ललिता
मैं चाहे कितना करूँ प्यार कान्हा से
कान्हा का प्यार राधा, सिर्फ राधा के लिये है।
आम्र-मंजरी
कामदेव के वाण
पंचवाणों में।
जिंदगी सारी
दो गुना दो में कटी
फिर भी खाली।
गीत
चाँदनी रात में फिर-फिर के आया करो,
सो भी जाऊँ मैं अगर, तुम जगाया करो,
गीत प्यार के गाया करो।
‘हर-सिंगार’ सी बिछकर जीवन में,
सूने मन को महकाया करो,
‘निर्झर’ सी बहकर जीवन में
तन की तपन बुझाया करो,
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अंश हो तुम
काँटा भी चुभे तुम्हें
होती चुभन।
कृष्ण दीवानी
विष का पियाला पी
नाची है मीरा।