Saturday, April 13, 2024


स्नेह का धागा, संवाद की सुईं और क्षमा की दो बूँदें

जीवन की चादर में उधड़ते रिश्तों की तुरपाई कर देती हैं।


            अरूण गोविल 

Friday, April 12, 2024


अभी अपना चेहरा आँचल में छुपा लो तुम।

ख्वाबों में मिले हो हमसे ये राज छुपा लो तुम।।


            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, April 11, 2024


आने को कहा है

 

आने को कहा है

जब से तुमने

एक-एक पल

इन्तजार का

कट रहा है

मुश्किल में।

घड़ी-घड़ी

घड़ी देखती हूँ।

एक पल उमंग

एक पल उदासी

छा रही है

मन-मन्दिर में। 

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        डॉ. मंजूश्री गर्ग

Wednesday, April 10, 2024

 

        

हो आदि शक्ति तुम ही

 

निराकार हो या साकार तुम,

हो आदि शक्ति तुम ही।

नदियाँ इठलाती चलतीं,

फलती-फूलती प्रकृति तुम से ही।

गृह-नक्षत्र रहते घूमते,

चाँद चाँदनी बरसाता तुम से ही।

लीन प्रलय में होकर एक दिन,

नव जीवन सब पाते तुम से ही।


        डॉ. मंजूश्री गर्ग

Tuesday, April 9, 2024




चैत्री नवरात्र की हार्दिक शुभकामनायें। 

Monday, April 8, 2024

 

        

तेरी ही गंध से

धूप, दीप, चंदन,

अक्षत रखे हैं थाल में।

अर्ध्य देने को आतुर

हैं नयन हमारे।

प्रिय! बीत गया विरह का मौसम

बासंती मौसम आ गया।

बासंती गंध से महक रहे

राजपथ के गलियारे।

दिल के गलियारे महकें

तेरी ही गंध से।


    डॉ. मंजूश्री गर्ग

Sunday, April 7, 2024


तेरी जुल्फों के साये में शामें सुहानी हैं,

हैं रोशन रातें तेरी ही मुस्कानों से।

बज उठते हैं जब तेरी यादों के घुँघरू

जिंदगी कई सरगमें सुनाती है हमें।।


            डॉ. मंजूश्री गर्ग