Thursday, October 1, 2026

 

वट वृक्ष


डॉ. मंजूश्री गर्ग

वट वृक्ष भारत का राष्ट्रीय वृक्ष है। यह सैंकड़ों वर्षों तक जीवित रहने वाला सदाबहार पेड़ है। इसे बरगद और बड़ के नाम से भी जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम है Ficus benghalensis और अंग्रेजी में इसे banyan कहते हैं। भारत के उत्तर प्रदेश में संगम के किनारे ऐसा ही एक वट वृक्ष है जिसे अक्षय वट कहते हैं। भारत में प्रायः सभी जगह वट वृक्ष पाये जाते हैं। पाँच वट वृक्षों का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है-

1.      अक्षय वट- प्रयागराज

2.      पंचवट- नासिक

3.      वंशीवट- वृंदावन-मथुरा के बीच भाण्डीरवन में

4.      गयावट- गया

5.      सिद्ध वट उज्जैन

भारत के अतिरिक्त नेपाल, वर्मा, श्रीलंका, इंडोनेशिया, जापान, पाकिस्तान, आदि देशों व अन्य उष्ण कटिबंधीय देशों में भी पाया जाता है।

वट वृक्ष की शाखाओं से जड़ें निकलकर धीरे-धीरे धरती के अन्दर चली जाती हैं और पेड़ के लिये एक स्तम्भ का काम करती हैं. इन जड़ों को ‘बरोह’ या ‘प्राप’ जड़ कहते हैं। यह एक द्वीबीजपत्री व सपुष्पक वृक्ष है। इसकी लंबाई लगभग 15 से 20 मी. तक होती है और चारों तरफ काफी भूभाग में फैला होता है। कलकत्ता के बॉटनिकल गार्डन में 250 साल पुराना एक वट वृक्ष है जिसकी लंबाई 24.5 मी. के लगभग है और चारों ओर लगभग 18,918 वर्ग मी. के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। इसे सन् 1989 ई. में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया था। वट वृक्ष की पत्तियाँ लगभग 4 से 5 इंच चौड़ी व 7 से 8 इंच लंबी अंडाकार होती हैं। इसका फल छोटा गोलाकर व लाल रंग का होता है जिसके अंदर बीज पाया जाता है। वट वृक्ष अन्य पेड़ों की तुलना में 4 से 5 प्रतिशत अधिक ऑक्सीजन देता है लगभग बीस घंटों तक ऑक्सीजन देता है।

हिंदू धर्म में वट  वृक्ष की बहुत महत्ता है। प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को सुहागिन स्त्रियाँ वट सावित्री व्रत रखती हैं व वट वृक्ष की पूजा करती हैं।

 

No comments:

Post a Comment