Saturday, September 26, 2026


भाव-लहरी

ह्रदय में उमड़ी

शब्दों में बही।

                        डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, September 25, 2026


नदी जल में

किल्लोल हैं करती

पानी की बूँदें।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, September 24, 2026


थकित मन

चाँदनी सी शीतल

तेरी छुअन।

                        डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, September 23, 2026


मधु-मालती के फूल रात में खिलें।

महकें और महकायें मन-आँगन।।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, September 22, 2026


ताप सह के

देते हमें हैं छाँव

वट-पीपल।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, September 21, 2026


आज की बातें

बीते युग की बातें

होनी हैं कल।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, September 20, 2026


बरखा बाद

धानी चूनर ओढ़

सजी धरती।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग