Friday, April 10, 2026


जाम से नहीं

नयनों से पीकर

बहके हम।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, April 9, 2026


चिड़ियाँ जागीं

चहकी डाली सारी

हुआ सबेरा।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, April 8, 2026


'साहित्य' वही

सर्वजन हित में 

सर्वदा रहे।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, April 7, 2026


आगे तो बढ़ो

झरने की तरह

जानेंगे सब।

                   डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, April 6, 2026


जलता दिया

मिट्टी का या सोने का

एक समान।

                        डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, April 5, 2026


लाल माणिक

सूर्य ग्रह सा तेज

नवरत्न में।

                                  डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, April 4, 2026


छेड़ा जो जल

अनगिन लहरें

नदी में बनी।

                      डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, April 3, 2026


मन द्वारे पे

खिले खुशी के रंग

सजी रंगोली।

                       डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, April 2, 2026


जय श्री राम

राम-सेतु बनाया

नल-नील ने।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, April 1, 2026


दो घड़ी ठहर कर

जीवन की नदी को

बहते देखना है

कविता वहीं कहीं है।

             प्रसून जोशी 

Tuesday, March 31, 2026


सिंहासन पे

राम की पादुकायें

राम वन में।

                     डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, March 30, 2026


प्यार की ज्योत से आलोकित है अंतर्मन,

बहती हैं ज्ञान की नित नयी निर्मल धारायें।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, March 29, 2026


छूटी लगाम

दौड़े मन के घोड़े

टूटा संयम।

                  डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, March 28, 2026


धागे में पिरे

माला बन गये ये

मोती निराले।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, March 27, 2026


मित्र वो सच्चा

आईना बनकर

साथ निभाता।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 


 
27 मार्च, 2026 रामनवमी की हार्दिक शुभकामनायें

Wednesday, March 25, 2026



शत्-शत् नमन माँ को सदा हम करते हैं
 ज्योति माँ के चरणों में सदा जलती रहे
औ' शंख-ध्वनि सदा गूँजती रहे।
कृपा दृष्टि सदा माँ बनाये रखना,
हमारे मन में ज्ञान ज्योति सदा जलती रहे।
            
                डॉ. मंजूश्री गर्ग


 

Tuesday, March 24, 2026


पिय से मिल 

मन मयूर नाचे

गाये कोयल।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, March 23, 2026


चार दिन की चाँदनी से जिंदगी कटती नहीं,

जिंदगी को चाहिये हर दिन ही नहीं, हर पल उजाला।। 

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

Sunday, March 22, 2026


तुमसे मिल

जिंदगी मीठी हुई

नीम सरीखी।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, March 21, 2026


भोर चहकी

इठलाई किरन

महकी क्यारी।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, March 20, 2026

 

बदलते मौसम का हाल क्या कहिये,

सेंसेक्स की तरह चढ़ता-उतरता है पारा।

                    डॉ. मंजूश्री गर्ग

Thursday, March 19, 2026


घोंसला एक

तिनके गूँथ-गूँथ

बया ने रचा।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, March 18, 2026


ज्ञान दीप से

उजियारा जग में

हर युग में।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, March 17, 2026


पार उतारा

केवट ने राम को

या स्वयं तरा।


            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, March 16, 2026


गेहूँ के खेत
लहलहाती बाली
सोने सी लगी।
            
        डॉ. मंजूश्री गर्ग

 

Sunday, March 15, 2026


पीछे ना हटें

बढ़ें, लक्ष्य की ओर

कदम तेरे।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, March 14, 2026


कान्हा की छवि

सिर मोर-मुकुट

कर बाँसुरी।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, March 13, 2026


राधा ही नहीं

रूप, रस, माधुरी

कान्हा के साथ।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, March 12, 2026


बंद मुठ्ठी में 

अनगिन सपने

लेकर आये।

                         डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, March 11, 2026


अरूणिम सुबह हो तुम, सुरमई शाम हो तुम

                           कड़ी धूप में छाँव हो तुम

                                प्रिये! मनमीत हो तुम।


जिंदगी तुमसे शुरू, पूरी होगी तुमसे ही

                        जीवन आधार हो तुम

                              प्रिये! मनमीत हो तुम।

                                            डॉ. मंजूश्री गर्ग

 

Tuesday, March 10, 2026


अंक एक है

शून्य जितने मिले

बढ़ता मान.

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, March 9, 2026


बातें उसकी

याद अब आती हैं

जब वो नहीं।

                        डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, March 8, 2026


छूने आकाश

चल दिये परिंदे

पक्के इरादे।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, March 7, 2026


आम के बाग

सौधीं सी महक औ'

मीठी सी धूप। 

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

Friday, March 6, 2026


मैं चाहूं तो भी मुझको चैन से रहने नहीं देगा।

मेरे भीतर अगर जिंदा कोई फनकार है कोई।।

                कमलेश भट्ट 'कमल' 

Thursday, March 5, 2026


हीरा हो तुम

तराशा है तुमको

प्यार से मैंने।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, March 4, 2026


4 मार्च, 2026 हिन्दू नव वर्ष विक्रमी संवत् 2083 के प्रथम महीने(चैत्र मास) के कृष्ण पक्ष के 

प्रथम  दिन पर हार्दिक शुभकामनायें


Tuesday, March 3, 2026

 


बिन बादल
इंद्रधनुष बने
होली के दिन।
                डॉ. मंजूश्री गर्ग


Monday, March 2, 2026


होली पर्व की हार्दिक शुभकामनायें 

फागुन मास

होली का त्यौहार

रंग-रंगीला।

1.


टेसू के रंग

गुझियों की मिठास।

होली के संग।

2.

        डॉ. मंजूश्री गर्ग

Sunday, March 1, 2026


चंदन हम

कोटोगे तो भी हम

देंगे सुगंध।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, February 28, 2026


कन्हैया हो तुम

तुम्हीं कान्हा हो, कन्हैया हो तुम।

तुम्हीं नन्दलाला, वासुदेव हो तुम।

तुम्हीं माखनचोर, चितचोर हो तुम।

तुम्हीं बाँसुरी वादक, सुदर्शन चक्रधारी हो तुम।

गोपों संग ग्वाला, गोपियों की प्रीत हो तुम।

राधा के मनमीत, द्वारकाधीश रूक्मिणी के।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

 

Friday, February 27, 2026


कभी ओला, कभी बारिश,

कभी धनकती धूप।

रोमांच से भरा है

फरवरी का मौसम।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, February 26, 2026


जिंदगी की पतवार तुम ही।

उस पार लगा दो तुम ही।।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, February 25, 2026


 लठ्ठमार होली

कान्हा खेल रहे होली  वृन्दावन में,

राधा राह तके बरसाने में।

आयेगी कान्हा की टोली जब,

लेंगें रंग के साथ खबर लाठी सेे।

कह रही सखियाँ राधा से,

खेलेंगे सब मिल लठ्ठमार होली बरसाने में।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग

Tuesday, February 24, 2026

 

बारह महीना-बसंत

                     डॉ. मंजूश्री गर्ग

बसंत तो हमारे मन में है

बारह महीने रहता है

बस उसे महसूस करना है

आनंद का अनुभव करना है.

 

ग्रीष्म ऋतु में

शीतल पेय और आइसक्रीम

मधुर मुस्कान लाते हैं.

कौन कहता है! ग्रीष्म ऋतु शुष्क ऋतु है

खरबूजे, तरबूज की सरसता

इसी ऋतु में मिलती है.

 

बर्षा ऋतु तो

है पावस ऋतु

चारों ओर हरियाली

भीगी-भीगी हवा

पत्तों से झरता पानी

मन लुभाते ही हैं.

पायस फल आम भी

इसी ऋतु में सरसता भरता है.

 

शरद ऋतु तो

है ही पावन ऋतु

मंद-मंद समीर

स्वच्छ चाँदनी

वृक्षों से झरते

हारसिंगार के फूल

मन में मादकता भरते ही हैं

 

शिशिर ऋतु भी

नहीं है कम सुहावनि

सखियों संग

धूप में चौपालें

रात गये चाय-कॉफी की पार्टी

मेवा की गुटरगूँ

गन्ने की मिठास

इसी मौसम की

सौगातें हैं

 

हेमन्त ऋतु है

ले आती है संदेश बसंत का.

अनायास ही

झड़ते पेड़ों से पत्ते

खेतों में खिलने लगते

सरसों के फूल

सोये हुये अरमान

जागने लगते

फिर एक बार

 

बसन्त ऋतु तो

है बसंत ऋतु

प्रकृति के कण-कण में

नव आनंद, नव उत्साह

नजर आने लगता है.

वृक्ष नये परिधान पहन सज जाते हैं

वहीं पशु-पक्षी ही क्या

वन-तड़ाग तक नव उत्साह से

भर जाते हैं फिर एक बार.

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Monday, February 23, 2026

 

 सीता की प्रतिज्ञाः

                         डॉ. मंजूश्री गर्ग

शूल नहीं चुभे थे कभी

कंटक भरी राहों में,

क्योंकि तुम साथ थे.

रावण की लंका में भी

रही थी सुकून से

क्योंकि तुम साथ थे.

 

आज अकारण ही

निर्वासित किया है तुमने

जानते हुये भी कि

गर्भ में तुम्हारा ही अंश है.

 

बहुत ही अकेली

महसूस कर रही हूँ

मैं जग में.

अपनी ही परछाईं से

डर रही हूँ

मैं वन में.

 

आज राम तुमने नहीं!

मैंने निर्वासित किया है

तुम्हें ह्रदय से.

भूमि से जन्मी हूँ

भूमि में समा जाऊँगी

पर वापस तुम्हारी

अयोध्या में

कभी नहीं आऊँगी.

 

श्रीराम के उद्गारः

 

सीते! वृथा व्यथित होती हो प्रिये!

तुम्हारा राम तो तुम्हारे साथ है।

मृदुल, सौम्य राम तुम्हारे साथ ही

निर्वासित हुआ है अयोध्या से।

 

अयोध्या में तो अयोध्या की निष्ठूर प्रजा का

निष्ठूर राजा राम है, ह्रदयहीन राम है।

तुम बिन अयोध्या ही नहीं,

श्रीहीन है अयोध्या का राजसिंहासन भी।

वंदनीय राम दरबार की वही झाँकी होगी

जहाँ तुम विराजती हो सस्मित राम के वाम अंग।


 


Saturday, February 21, 2026


संयुक्त परिवारों के टूटते ही, संयुक्तता टूटती गयी।

ना आश्रय वृद्धों का रहा, ना छाँव बालकों की रही।

                                      डॉ. मंजूश्री गर्ग 


 

बार-बार आती है मुझको

मधुर याद बचपन तेरी,

आ जा बचपन, एक बार फिर

दे दो अपनी निर्मल शान्ति

व्याकुल व्यथा मिटाने वाली

वह अपनी प्राकृत विश्रांति।

                   सुभद्रा कुमारी चौहान

 

Thursday, February 19, 2026

 

यशोदा हरि पालने झुलावै।

हलरावै दुलराइ मल्हावै, जोइ-सोइ कछु गावै।

मेरे लाल को आउ निंदरिया, काहै ना आनि सुवावै।

तू काहै न बेगहिं आवै, तोको कान्ह बुलावै।

कबहुँ पलक हरि मूँद लेत हैं, कबहुँ अधर फरकावै।

सोवत जानि मौन है करहिँ, करि-करि सैन बतावै।

इति अंतर अकुलाई उठे हरि, जसुमति मधुर गावै।

जो सुख सूर अमर मुनि दुर्लभ, सो नंदभामिनी पावै।

                                      सूरदास

उपर्युक्त पंक्तियों में कवि ने यशोदा के माध्यम से भारतीय माँ का ही चित्र उकेरा है जो पालने में अपने लाल को सुला रही है, सोया जानकर आँखों के इशारे से सबको चुप रहने को कहती है. वहाँ से हटकर घर के और काम करना ही चाहती है कि बालक अकुलाकर उठ जाता है.


Wednesday, February 18, 2026


रंगों पे रंग

फूलों पे तितलियांँ

उड़ती हुईं।

                      डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, February 17, 2026


बर्फ निराली

धूप की छुअन पा

बनी लहर।

                      डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, February 16, 2026


बुलंदियों को देख समझो ये फलसफा,

गहराई नींव की जरूरी है ऊँचाई के लिये।

                शालिनी गर्ग 

Sunday, February 15, 2026



15 फरवरी, 2026 फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि महाशिवरात्री पर्व

 की 
 

हार्दिक शुभकामनायें

Saturday, February 14, 2026


दो पल जिंदगी जिये हम,

एक पल तुमसे मिलने का,

एक पल तुमसे जुदाई का।

दो उपहार मिले जीवन में,

एक उपहार मुस्कान का,

और एक  मिला आँसू का।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

Friday, February 13, 2026


बादलों से आ

मोती बनी सीपी में 

एक बूँद थी।

                     डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, February 12, 2026


मन मोहती

फिर कूकी कोयल

बागों के बीच।

                            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, February 11, 2026


कर्तव्य-पथ पर बढ़ते रहें कदम हमारे, कभी ना डिगें।

नित नयी लिखती रहें कथायें शौर्य और पराक्रम की।।

                            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, February 10, 2026


ज्ञान की धारा भी, नदी की धारा के समान ऊपर से नीचे की ओर बहती है इसीलिये गुरू का 

आसन हमेशा शिष्य के आसन से ऊँचाई पर होता है।

                                                                    डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, February 9, 2026


मैं आऊँगा! आऊँगा! आऊँगा!

कभी मैं हवा बन के आऊँगा,

बिखरेंगी जुल्फें तेरी, सवारूँगा।


कभी मैं चाँद बन के आऊँगा,

छूकर गात तेरे, चाँदनी बिखराऊँगा।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, February 8, 2026


देखते ही उन्हें पलकें झुका लेते हैं।

नजर लग जाती है नजर भर देखने से।

                नीरा नंदन 

Saturday, February 7, 2026


प्यार, ममता

सदभावना पले

जन-मन में।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग

 

Friday, February 6, 2026


पासे का खेल

'चौपड़' बना 'लूडो'

वही पुराना।

                  डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, February 5, 2026

 

बसन्ती मौसम

पीली-पीली सरसों

मनभावन।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग

Wednesday, February 4, 2026


और झुके हैं

फलों से लदे वृक्ष

नतमस्तक।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Tuesday, February 3, 2026


सूर के पद

तुलसी की चौपाई

युगों ने गायीं।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Monday, February 2, 2026


कैसे कटें ये

दिन औ' रात बिन

धूप-चाँदनी।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Sunday, February 1, 2026


हवायें चलें

या बरसें बादल

छटेगी धुंध।

                    डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, January 31, 2026


तेरे रूप से

साकार है संसार

गंध जीव में।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Friday, January 30, 2026


जग सौन्दर्य

मन का भी सौन्दर्य

देखा कवि ने।

                 डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Thursday, January 29, 2026


अपनी जड़ें

देश हो या विदेश

ना काटो तुम।

            डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Wednesday, January 28, 2026


बर्फीली हवा

मैदानी इलाकों में

उतर आई ।

                    डॉ. मंजूश्री गर्ग

Tuesday, January 27, 2026


भावुक मन और सिंधु का, एक सरीखा रूप।

जिस पर जितनी तरलता, उतनी उस पर धूप।।

                डॉ. कुँअर बेचैन 

Monday, January 26, 2026

26 जनवरी 2026, 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें


 कर्तव्य-पथ पर बढ़ते रहें कदम हमारे, कभी ना डिगें।

नित नयी लिखती रहें कथायें शौर्य और पराक्रम की।।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग

Sunday, January 25, 2026


उम्मीदें जगीं

सपनों की चादर

बुनने लगी।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग 

Saturday, January 24, 2026


 खिले कमल

पंक में रहकर

पंक से दूर।

                डॉ. मंजूश्री गर्ग