भोर का तारा हूँ मैं
आओ मेरे साथ जागो।
कुछ पल साथ चलो।
भोर का तारा हूँ मैं,
देकर तुम्हें नयी सुबह,
जीवन में भर कर उजाला,
खो जाऊँगा मैं कहीं।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
No comments:
Post a Comment