हिन्दी साहित्य
Thursday, June 23, 2022
मुठ्ठी भर धूप,
उछाल दो।
गम के बादलों पे,
गम भी मुस्कुरायेंगे।।
डॉ. मंजूश्री गर्ग
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment