Thursday, December 7, 2017


बिम्ब-विधान

डॉ0 मंजूश्री गर्ग

शब्दों के माध्यम से निर्मित चित्र ही बिम्ब कहलाता है. काव्य-बिम्ब फोटो की तरह यथार्थ बिम्ब न होकर कवि की मानसिकता और भावना के अनुरूप कल्पना द्वारा निर्मित होते हैं. इसमें किसी वस्तु का आभास मात्र होता है. बिम्ब में इन्द्रियों का विशेष स्थान है, इन्द्रियों के द्वारा ही कवि किसी भाव की अनुभूति ग्रहण करता है और उस अनुभूति को कल्पना के माध्यम से शब्दों द्वारा चित्रित करता है. शब्द चित्रों की अनुभूति पाठक या श्रोता पढ़कर या सुनकर ग्रहण करते हैं, साथ ही कवि की अनुभूति से तादात्म्य स्थापित करते हैं. बिम्ब की प्रभावात्मकता उसकी ऐन्द्रियता पर ही निर्भर करती है. इंद्रियों के आधार पर ही बिम्ब के पाँच प्रसुख भेद होते है-

क.  दृश्य बिम्ब
ख.  श्रव्य बिम्ब
ग.   स्पर्श बिम्ब
घ.   घ्राण बिम्ब
ङ.    स्वाद बिम्ब

क.दृश्य बिम्ब-

दृश्य बिम्ब का सम्बन्ध नेत्रों से है. जब किसी काव्य को पढ़कर या सुनकर आँखों के सामने किसी घटना या वस्तु का चित्र सा उभर आता है तब वहाँ दृश्य बिम्ब होता है.
 उदाहरण-
     रश्मियों की सूक्ष्म सुइयों में रजत के तार भर,                           शशिकला ने भू-वसन पर की कढ़ाई रात में।

उपर्युक्त पंक्तियों में कवि ने चाँदनी रात में प्रकट हुये पृथ्वी के सौन्दर्य का दृश्य उभारकर प्रक्रति के मनोरम दृश्य का दृश्य बिम्ब प्रस्तुत किया है.

ख.श्रव्य बिम्ब-

श्रव्य बिम्ब का सम्बन्ध कर्णेन्द्रिय से है. जब किसी काव्य को पढ़कर या सुनकर किसी वाद्य या अन्य प्रकार की ध्वनि का आभास होता है तब वहाँ श्रव्य बिम्ब होता है.
उदाहरण-

खूब झम-झम कर बरस काली घटा.

उपर्युक्त पंक्ति को पढ़कर तेजी से बरसती हुई बारिश का शोर कानों में गूँजता सा महसूस होता है. इसलिये यहाँ श्रव्य बिम्ब है.

ग.स्पर्श बिम्ब-

स्पर्श बिम्ब का सम्बन्ध त्वचा से होता है. जब किसी काव्य को पढ़कर या सुनकर ऐसा आभास होता है कि किसी वस्तु की कोमलता या खुरदुरेपन ने हमें स्पर्श सा किया है, तब वहाँ काव्य में स्पर्श बिम्ब होता है.
 उदाहरण-

     जले जो रेत में तलुवे तो हमने ये देखा
     बहुत से लोग वहीं छटपटा के बैठ गये.

उपर्युक्त पंक्तियों में कवि ने प्रखर धूप में तपी रेत से स्पर्श होते तलुवे का स्पर्श बिम्ब प्रस्तुत किया है.

घ.घ्राण बिम्ब-

घ्राण बिम्ब का सम्बन्ध घ्राणेन्द्रिय से है. जब किसी काव्य को पढ़कर या सुनकर किसी वस्तु की सुगन्ध या दुर्गन्ध का आभास होता है, तब वहाँ घ्राण बिम्ब होता है.
उदाहरण-

     सोंधी-सोंधी महक है मिट्टी की,
     पहली-पहली फुहार में शामिल।

उपर्युक्त पंक्तियों में गर्मी के मौसम के बाद जब वर्षा ऋतु के प्रारम्भ में पहली फुहार पड़ने से जो मिट्टी से सोंधी महक उठती है, उसी का घ्राण बिम्ब प्रस्तुत किया गया है.

ङ.स्वाद बिम्ब-

स्वाद बिम्ब का सम्बन्ध स्वादेन्द्रिय से है. जब किसी काव्य को पढ़कर या सुनकर किसी वस्तु के खट्टे, मीठे, नमकीन या कसैले होने का आभास होता है, तब वहाँ स्वाद बिम्ब होता है.

उदाहरण-

     कुकुरमुत्ते की कहानी
     सुनी जब बहार से
     नबाब के मुँह में आया पानी.

उपर्युक्त पंक्तियों में कुकुरमुत्ते के स्वाद के बिम्ब को उभारा गया है, इसलिये यहाँ स्वाद बिम्ब है.










































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